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LS Election: ग्रामीणों ने किया सामूहिक मतदान का बहिष्कार, दोपहर बाद मानें,जानें कितने ग्रामीणों ने किया मतदान

Sat, 01 Jun 2024 05:58 PM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, जंगल कौडिया

सार

क्षेत्रीय विधायक फतेह बहादुर सिंह से वीडियो कॉल पर आश्वासन मिलने के बाद दोपहर 12:00 बजे के बाद ग्रामीणों ने मतदान शुरू किया। शाम साढ़े पांच बजे तक 990 मत के सापेक्ष कल 400 मत पड़े थे।
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मतदान केंद्र पर पसरा सन्नाटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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जंगल कौड़िया ब्लाक के कैंपियरगंज तहसील अंतर्गत थवईपार और रगरगंज गांव के ग्रामीणों ने शनिवार को बूथ संख्या 274  पर सुबह से ही प्रशासन और नेताओं का प्रति विरोध जताना शुरू कर दिया। गांव वालों ने सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार कर दिया।

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कैंपियरगंज तहसील अंतर्गत थवईपार और रगरगंज गांव के ग्रामीणों ने शनिवार को बूथ संख्या 274  पर सुबह से ही संगठित होकर प्रशासन और नेताओं के प्रति विरोध जताया था और सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार कर दिया था।
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गांव के मुख्य मार्ग पर ग्रामीणों ने बैनर लगाया था कि " चकबंदी नहीं तो वोट नहीं' रामावतार विश्वकर्मा, रामकेरे सिंह पूर्व प्रधान, संतोष कुमार वर्तमान प्रधान, विदेशी सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि देश आजाद होने के बाद भी गांव में आज तक चकबंदी नहीं हुई जिसके चलते ना नालियां बन पाई है ना सड़के बना पाई है। गांव में रहना दुश्वार हो गया है। चकबंदी के लिए 1959 में अधिसूचना जारी हुआ जो 1961 में संपन्न हुआ तथा 1962 में धारा 45 पूर्ण हुआ परंतु उसके बाद आज तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

ग्रामीण दोपहर 12 बजे तक जिलाधिकारी को गांव में बुलाने की मांग करते रहे। जिलाधिकारी द्वारा चकबंदी कराए जाने का आश्वासन देने के बाद ही मतदान करने की मांग मौके पर मौजूद अधिकारियों से करते रहे।

अधिकारियों के समझाने बुझाने के बाद और क्षेत्रीय विधायक फतेह बहादुर सिंह से वीडियो कॉल पर आश्वासन मिलने के बाद दोपहर 12:00 बजे के बाद ग्रामीणों ने मतदान शुरू किया। शाम साढ़े पांच बजे तक 990 मत के सापेक्ष कल 400 मत पड़े थे।

 

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चकबंदी नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगाकर मतदान का विरोध जताते लोग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामावतार विश्वकर्मा, रामकेरे सिंह पूर्व प्रधान, संतोष कुमार वर्तमान प्रधान, विदेशी सिंह ने बताया कि देश आजाद होने के बाद भी गांव में आज तक चकबंदी नहीं हुई, जिसके चलते ना नालियां बन पाई है ना सड़कें बना पाई हैं।

गांव में रहना दुश्वार हो गया है। चकबंदी के लिए 1959 में अधिसूचना जारी हुआ, जो 1961 में संपन्न हुआ तथा 1962 में धारा 45 पूर्ण हुआ परंतु उसके बाद आज तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर शीघ्र चकबंदी कराने की मांग की है।
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