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Gandhi Peace Prize: गीता प्रेस को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत, यह सनातन संस्कृति की संवाहक

Tue, 20 Jun 2023 12:56 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गीता प्रेस ने सदैव लोक कल्याण की भावना से देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। यह सनातन संस्कृति की संवाहक है। इसे राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। विरोध करने के लिए विरोध करना उचित नहीं होता है।
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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के बयान पर गोरक्षनगरी के बुद्धिजीवियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तमाम शिक्षाविदों, साहित्यकारों और राजनीतिक हस्तियों ने जयराम के बयान की आलोचना की है। उनका मानना कि गीता प्रेस ने सदैव लोक कल्याण की भावना से देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। यह सनातन संस्कृति की संवाहक है। इसे राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। विरोध करने के लिए विरोध करना उचित नहीं होता है। वहीं, गीता प्रेस के प्रबंधन ने जयराम रमेश के बयान को राजनीतिक बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार किया है।

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मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं जयराम
राज्यसभा सदस्य डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि जयराम रमेश भारत जोड़ो यात्रा के बाद से मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं। उन्हें लगता था कि वे कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाएंगे, लेकिन गांधी परिवार ने उनके प्रतिद्वंदी खरगे को अध्यक्ष बना दिया। तबसे वह तथाकथित गांधी परिवार में अपना नंबर बढ़ाने के लिए अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं।

कहा कि हिंदू संस्कृति व आध्यात्मिक मूल्यों को दुनिया में स्थापित करने का काम गीता प्रेस ने किया है। अब तक यह संस्थान पूरी तरह से अराजनैतिक रहा है। घटिया तरीके से गीता प्रेस का राजनीतिकरण करने और अपमानित करने से स्व. हनुमान प्रसाद पोद्दार और जयदयाल गोयंनका की आत्मा को चोट पहुंची होगी। राज्यसभा में इस अपमान को उठाऊंगा।
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पाकिस्तानी समर्थकों को लुभाने के लिए दिए बयान

Ravi Kishan - फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा गोरखपुर सांसद रवि किशन शुक्ल ने कहा कि जयराम रमेश के बयान से सनातनी विचारधारा को मानने वालों को कष्ट पहुंचा है। पूरे विश्व में गीता प्रेस की प्रतियां जाती हैं। महात्मा गांधी की विचारधारा को पूरा विश्व मानता है। गोडसे और सावरकर से जोड़कर गीता प्रेस और गांधी जी को जोड़ा गया है। अपने बयान के लिए जयराम रमेश को माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेसी नेता, पाकिस्तान को मानने वाले एक खास वर्ग को लुभाने के लिए इस तरह का बयान दे रहे हैं। गीता प्रेस धर्मार्थ का कार्य करता है। यह आध्यात्म का स्कूल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं कि 100 वर्ष पूरे होने पर गीता प्रेस को इतना बड़ा सम्मान दिया है।

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गीताप्रेस आकर देख लें धारण बदल जाएगी

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के पास यही काम रह गया है कि वह नरेंद्र मोदी के हर फैसले का विरोध करते हुए गलत बयानबाजी करें। मैं मानता हूं कि हर कोई सही नहीं होता है। सभी व्यक्ति में सकारात्मक और नकारात्मक चीजें होती हैं, लेकिन गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार मिलना बिल्कुल सही है। गीता प्रेस इस सम्मान का पात्र है। यह सम्मान गोरखपुर का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए बड़ी बात है। जिन्होंने गीता प्रेस के बारे में गलतबयानी की है, उन्हें गोरखपुर आकर गीता प्रेस की कार्य पद्धति को देखना चाहिए। मुझे लगता है कि इसके बाद उनकी धारणा बदली जाएगी।

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गीता प्रेस को राजनीतिक चेतना से न जोड़ें

गोरखपुर विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक त्यागी ने कहा कि महात्मा गांधी का उद्देश्य स्वाधीनता के साथ आध्यात्मिक व नैतिक जागरण भी था। गीता प्रेस इस जागरण का एक अहम पक्ष है। ऐसे में गीता प्रेस की शास्वत यात्रा को महात्मा गांधी की वैचारिक यात्रा से जोड़ना आज के समय में महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। गांधी जी ने जिस शुचिता, सहिष्णुता व सद्भाव एवं मूल्यधर्मी चेतना के विकास में अपना सर्वस्य समर्पित कर दिया, गीता प्रेस की संपूर्ण साधना गांधी जी की उसी विचार यात्रा की सहचर प्रतीत होती है। समय के साथ महात्मा गांधी की विचार यात्रा और गीता प्रेस की आध्यात्मिक यात्रा को एक साथ रखकर देखने की जरूरत है। गीता प्रेस की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। इसलिए, किसी तरह से इसे राजनीतिक चेतना से जोड़ना ठीक नहीं है।
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