जिला अस्पताल में सक्रिय दलाल मरीजों को बरगलाकर दाउदपुर, पादरी बाजार, बेतियाहाता, तारामंडल इलाके के कुछ अस्पतालों में भेजते हैं। बताया जाता है कि जिला अस्पताल में ड्यूटी करने वाले कुछ डॉक्टर इन अस्पतालों में जाकर सर्जरी भी करते हैं। खोवा मंंडी में स्थित एक अस्पताल की भी भूमिका संदिग्ध है। बताया जा रहा है कि वह अस्पताल पहले दूसरे नाम से खुला था। लेकिन, शिकायत के बाद जब सील हुआ तो नाम बदल कर फिर से अस्पताल खोल लिया।
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न्यूरो के मरीजों का रेट सबसे अधिक
बताया जा रहा है कि न्यूरो के मरीजों का रेट सबसे अधिक है। क्योंकि, जिला अस्पताल में न्यूरो फिजिशियन और न्यूरो सर्जन नहीं हैं। इन मरीजों को जिला अस्पताल के डॉक्टर बीआरडी रेफर कर देते हैं। इस बीच दलाल मरीजों को फंसा लेते हैं और दाउदपुर और पैडलेगंज के निजी अस्पताल में न्यूरो सर्जन के यहां ले जाते हैं। यहां पर एक मरीज भेजने पर दलाल को 20 से 25 हजार रुपये मिलता है। इसके लिए दोनों अस्पतालों के बड़े डाॅक्टरों ने अपने-अपने आदमी भी लगा रखे हैं।
जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि जिला अस्पताल में दलालों और अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा लगा रहता था। इसके लिए डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है। कुछ हद तक इस पर रोक भी लग गई है। जिला अस्पताल के सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।