मृत बुजुर्ग महंगू के दामाद शंभु ने बताया कि ससुर करीब एक वर्ष बाद उनके दरवाजे पर अपने बेटी से मिलने आ रहे थे। रास्ते में मौत बनकर खड़े पीपल के पेड़ को वह पार नहीं कर सके। दरवाजे पर पहुंचने से पहले ससुर महंगू की पीपल के पेड़ के नीचे दबने से दर्दनाक मौत हो गई।
बेटी करती थी महंगू की देखभाल
मृत महंगू की पत्नी जगवंती ने बिलखते हुए कहा कि दो बेटे शंभु और गौतम के अलावा एक बेटी मीरा है। मीरा दो भाइयों में सबसे बड़ी है। बेटा गौतम कोठीभार थाना क्षेत्र के एक ईंट उद्योग तथा शंभु नेपाल राष्ट्र में एक ईंट उद्योग पर मजदूरी करते हैं। दोनों बेटों को घर पर न रहने के चलते बेटी मीरा अक्सर घोड़हवा आती रहती थी। जहां पर पति महंगू और उनकी देखभाल करती थी।