- माघ महीने में स्नान-दान का है विशेष महत्व
- कल मनाई जाएगी स्नान-दान की पूर्णिमा, पवित्र नदियों में होगा स्नान व दान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान और उसके तट पर तपस्या, स्नान और दान का हिंदू सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। हालांकि माघ स्नान का क्रम पौष की पूर्णिमा से ही माना जाता है। यह तीन जनवरी को होगी। इसके पहले दो जनवरी शुक्रवार को पौष की पूर्णिमा होगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रहेंगे।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि माह में शीतल जल के भीतर डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त होकर स्वर्ग जाते हैं। महाभारत में कहा गया है कि माघ मास को प्रयागराज में तीन करोड़ 10 हजार तीर्थों का समागम होता है। प्रयागराज के अतिरिक्त काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार आदि अन्य पवित्र तीर्थों व बहती हुई नदियों में स्नान का भी बड़ा महत्व है। इस महीने में स्नान सूर्योदय से पूर्व किया जाता है। माघ मास के स्नान से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि माघ स्नान प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु की नियमित पूजा करनी चाहिए और हरि कथा श्रवण करनी चाहिए। संपूर्ण माघ मास में दिन में केवल एक बार ही आहार ग्रहण करना चाहिए। महाभारत में कहा गया कि जो माघ मास में नियमपूर्वक केवल एक समय ही भोजन करता है, वह अगले जन्म में धनवान कुल में जन्म लेकर अपने कुटुंबियों में महत्व प्राप्त करता है। माघ मास में दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और कंबल से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
जनवरी में पड़ेंगे यह त्योहार
बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में कई महत्वपूर्ण त्योहार व व्रत पड़ेंगे। इसमें छह जनवरी मंगलवार को संकष्टी गणेश चतुर्थी, 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी व्रत व मकर संक्रांति है। प्रदोष व्रत शुक्रवार 16 दिसंबर को होगा। इसके साथ ही मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को होगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान-दान करेंगे।