उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को मानवता तार-तार हो गई। पुरानी इमरजेंसी के सामने एक मरीज पेट पकड़कर छटपटाता रहा। उधर से डॉक्टर व कर्मचारी गुजरते रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। सूचना पाकर जब तक पुलिस पहुंची, मरीज प्रताप विश्वकर्मा ने दम तोड़ दिया। वह गुलरिहा इलाके के खुटहन खास गांव का रहने वाला था।
बता दें कि यहां बेहतर इलाज के लिए लोग मेडिकल कॉलेज बड़ी उम्मीद लिए जाते हैं, लेकिन जब मेडिकल कॉलेज परिसर में ही मौजूद किसी व्यक्ति का इलाज न हो सके तो सवाल लाजिमी है। गुरुवार को तड़पते व्यक्ति को लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर में मरीज के सामने से ही लोग आते-जाते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। उसे इलाज के लिए किसी ने भर्ती नहीं कराया। शव के पास एक पीले रंग का झोला था, जिसमें मौजूद आधार कार्ड से उसकी पहचान गुलरिहा थाना क्षेत्र के खुटहन खास गांव निवासी 46 वर्षीय प्रताप विश्वकर्मा के रूप में हुई। झोले में पासबुक व दवा की पुरानी पर्ची, सैनिटाइजर व एक बोतल पानी भी था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया।
इस सिलसिले में प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार से बात की गई तो, उन्होंने घटना की जानकारी होने से इंकार किया। साथ ही कहा कि सभी प्रकार के मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। कोरोना संक्रमण के बीच चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ ईमानदारी से काम कर रहे हैं।