झीनक की मौत से सरकार की योजनाओं पर सवाल
अनाथ बालक झीनक की मौत के बाद सरकार की ओर से कुपोषण खत्म करने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं। हेल्थ कैंप, स्वास्थ्य परीक्षण और पोषाहार जैसी योजनाओं का लाभ झीनक और उसके भाइयों को क्यों नहीं मिल पाया? जबकि आए दिन इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। इन आयोजन में गांव-गांव में भ्रमण कर कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की जाती है। सवाल उठता है कि महीनों से बीमार झीनक तक यह मुहिम क्यों नहीं पहुंच पाई?
पीएचसी हाटा पर छोटे भाइयों संग कई बार गया था झीनक
सवाल यह भी है कि जब तीनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हट गया तो उन्हें सरकारी सुविधाएं क्यों नहीं मिलीं? जबकि बच्चों ने इस बारे में कई बार ग्राम प्रधान से लेकर खंड विकास अधिकारी कार्यालय तक गुहार लगाई थी। मंगलवार शाम गगहा सीएचसी प्रभारी को झीनक के गंभीर रूप से बीमार होने की बात बताई गई तो उन्होंने गंभीरता से न लेते हुए दूसरे दिन स्वास्थ्य परीक्षण कराने की बात कही। वहीं, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा में कई बार झीनक अपने भाई करन व अजय के साथ दवा लेने गया था। उसे सिर्फ खांसी और बुखार की दवा देकर लौटा दिया जाता था।
गगहा में हैं 626 कुपोषित बच्चे, इनमें झीनक और उसके भाइयों का नाम नहीं
खंड विकास अधिकारी कार्यालय में मौजूद आंकड़ों के अनुसार, गगहा क्षेत्र में 626 कुपोषित बच्चे हैं। इन बच्चों में झीनक और उसके भाई करन व अजय का नाम शामिल नहीं है। इस कारण प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के सर्वे पर भी सवाल उठ रहे हैं।