शाम को 5 बजकर 29 मिनट पर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से रिहाई का आदेश लेकर पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके लोग मंडलीय कारागार पहुंचे। बेटे के साथ उनके अधिवक्ता रिहाई का कागज लेकर जेल के अंदर पहुंचे। कागज प्रस्तुत करने के बाद जेल में कैदियों के निरूद्ध वाली डायरी में रिहाई के नाम पते का मिलान करवाया गया।
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कितनी बार जेल में आए और कितने मामले लंबित हैं, इसका सत्यापन किया गया। फिर जिस मामले में जेल में पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी निरुद्ध थे, उसकी रिहाई के आदेश को डायरी में दर्ज करने के साथ ही उसी समय का परवाना तैयार किया गया। इसी परवाने पर पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी मधुमणि के हस्ताक्षर के बाद उनकी रिहाई पूरी हो सकी।