2018 में चौरीचौरा इलाके में रोडवेज की बस में तोड़फोड़ की गई थी। सामने आया कि ईगल ग्रुप के लोगों ने यह काम किया। पुलिस ने पर्दाफाश किया तो नई उम्र के लोग पकड़े गए। पता चला कि बस में एक यात्री से बहस हो गई थी। इसके बाद उसमें बैठे युवक ने ईगल ग्रुप पर संदेश चलाया और रात 12 बजे चौरीचौरा में बस के पहुंचते ही तोड़फोड़ की गई।
केस दो
24 मई 2020 को झंगहा इलाके में खोराबार के रहने वाले दो चचेरे भाइयों की दावत के बहाने बुलाकर हत्या कर दी गई थी। तब पुलिस ने 12 युवकों को गिरफ्तार किया था। सामने आया था कि महाकाल ग्रुप बनाकर यह लोग आपस में बातचीत करते है। एक संदेश पर वहां पर सभी युवक पहुंचे थे और फिर हत्या हो गई थी।
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केस तीन
मार्च 2023: गुलरिहा पुलिस ने चार युवकों को पकड़ा। यह सभी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर असलहों की खरीद-फरोख्त करते थे। पहले असलहे की फोटो भेजी जाती थी, फिर उसका रेट तय होता था और एक युवक जाकर सप्लाई करता था। इसमें से एक युवक ने ही इसी असलहे का इस्तेमाल कर गुलरिहा इलाके में गैस एजेंसी के मैनेजर से लूटर की वारदात कर सनसनी फैलाई थी।
केस चार
11 जनवरी 2023 को बेलघाट पुलिस ने असलहा तस्करों को पकड़ा था। यह सभी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर असलहों की खरीद फरोख्त करते थे। इनके पास से असलहे भी बरामद किए थे। सभी की उम्र 24 साल से कम थी। पुलिस को इनके पास से कई ग्रुप और लोगों के नाम भी मिले थे। जिसकी मदद से आजमगढ़ के बदमाश को पकड़ा गया, लेकिन इसके बाद पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
वह पेशेवर अपराधी तो नहीं है, लेकिन मन में अपराध के शौक से इस दलदल में फंस रहे हैं। कम उम्र में भौकाल बनाने की चाहत में युवा तिकड़मी दिमाग वाले बदमाशों के बिछाए जाल में फंसते है। गुंडा, महाकाल, बिच्छू, एके 47 जैसे ग्रुप से जुड़े ज्यादातर सदस्य 16 से 25 साल की उम्र के हैं।
आसानी से इलाके में भौकाल बनाने की चाहत में ग्रुप के सदस्य बनते हैं और फिर वह अपराध के रास्ते पर चल पड़ते है। घरवालों को भी इसकी भनक तभी लग पाती है, जब वह किसी मामले में पकड़े जाते हैं। पुलिस इनके मारपीट के कारनामों को छोटा समझकर नजरअंदाज कर देती है और फिर यह बड़ी वारदात कर बदमाश बन जाते है, जिसके बाद पीछे लौटने का रास्ता बंद ही हो जाता है।
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समाजशास्त्री डॉ. दीपेंद्र सिंह ने कहा कि किशोर अवस्था उम्र का वह पड़ाव है, जहां से जीवन के अनगिनत रास्ते निकलते हैं। इसी उम्र में ऊर्जा और क्षमता भी भरपूर होती है। हालांकि, किशोरावस्था में कुछ शारीरिक व मानसिक बदलाव आते हैं जिससे थोड़ा भटकने की आशंका रहती है लेकिन इस उम्र का भटकाव भविष्य को अंधकार में डाल सकता है।आजकल बच्चों की एक समस्या सामान्य होती जा रही है, वो है मोबाइल फोन और इंटरनेट का हद से ज़्यादा उपयोग। ये एक ऐसा आकर्षण या लत बन गई है जिसका सीधा संबंध बच्चे के मानसिक विकास और कॅरियर से होता है। यदि बच्चों से मोबाइल छीन लिया जाए या इंटरनेट एक्सेस नहीं दिया जाए तो वे और ज़्यादा बौखला जाते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि बच्चों के फोन उपयोग करने के समय को निर्धारित किया जाए। अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की जरुरत है।