पुलिस के बारे में बच्चे बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं। वह फिल्मों और टीवी सीरियल को देखकर ही पुलिस के बारे में धारणा बना लेते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है। पुलिस का काम बहुत ही कठिन व चुनौतीपूर्ण है। चाहे जैसा भी मौसम हो उन्हें ड्यूटी करनी पड़ती है। हम बिना थके व रुके दिन-रात काम करते हैं ताकि आप सब चैन से सो सकें। पुलिस ही न्याय दिलवाती है।
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आम नागरिक से लेकर वीआईपी तक की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करती है। यह कहना है अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) जोन अखिल कुमार का। एडीजी अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी पहल के तहत मंगलवार को आरपीएम एकेडमी में आयोजित ऑनलाइन पुलिस की पाठशाला को संबोधित कर रहे थे।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मंगलवार को आरपीएम एकेडमी में पहली बार ऑनलाइन पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें कक्षा ग्यारह व बारहवीं के 300 से ज्यादा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। एडीजी ने ऑनलाइन ही विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र दिया है। एडीजी ने कहा कि हर विद्यार्थी को कानून की जानकारी होनी चाहिए। जाने-अनजाने में तमाम अपराध हो जाते हैं। अगर कानून की जानकारी रहेगी तो इससे बचा जा सकेगा।
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अब तकनीक का जमाना है। अगर आप या फिर आपका कोई सगा-संबंधी मुसीबत में फंसता है तो डायल 112 का सहारा लें। निर्धारित अवधि में पुलिस की मदद मिलेगी। महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 भी उपयोगी है। एडीजी ने कहा कि अपराध व आतंकवाद की चुनौतियां बढ़ी हैं। आपने देखा कि जम्मू कश्मीर में ड्रोन की मदद से विस्फोट कर दिया गया। अब आतंकियों को ढूंढ निकालने की चुनौती है। इस काम में सुरक्षा एजेंसियां लगी हैं। जिस तरह से विस्फोट किया गया, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंसूबा कितना खतरनाक था। अब उसी हिसाब से तैयारियां भी करनी पड़ेंगी।
शिक्षक की भूमिका में दिखे एडीजी
ऑनलाइन पुलिस की पाठशाला में एडीजी जोन अखिल कुमार शिक्षक की भूमिका में भी दिखे। विद्यार्थियों से कहा कि समय का सदुपयोग करें। समयसारिणी बनाएं। इसमें पढ़ाई के साथ ही खेलकूद को भी जगह मिलनी चाहिए। लक्ष्य को निर्धारित करके आगे बढ़ें। पढ़ाई केंद्रित होनी चाहिए। किसी तरह का भटकाव लक्ष्य भेदने में दिक्कत करता है। जो तय करें, उसे हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है।
कोरोना से कठिन चुनौती
एडीजी ने कहा कि कोरोना ने विद्यार्थियों के लिए कठिन चुनौती पेश की है। सब कुछ पटरी से उतरा है। ऑफलाइन कक्षाएं भी बंद हैं। हालांकि चुनौतियों ने अवसर भी दिया है। सब वर्चुअल हो गया है। इसी का नतीजा है कि ऑनलाइन पुलिस की पाठशाला कर रहे हैं। इसमें तीन सौ से ज्यादा विद्यार्थी जुड़े हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो हम और आप आमने-सामने होते। आपकी कक्षा में पुलिस की पाठशाला करते। कभी नहीं सोचा था कि हमें इस तरह की महामारी देखने को मिलेगी।
इनका रहा विशेष सहयोग
पुलिस की पाठशाला के आयोजन में आरपीएम एकेडमी के चेयरमैन अजय शाही व डायरेक्टर आराधना शाही, असिस्टेंट डायेक्टर अरिहंत शाही व राजरादित्य शाही का विशेष सहयोग रहा है। प्रिंसिपल लता द्विवेदी ने एडीजी का स्वागत किया और विद्यार्थियों से परिचय कराया। इस दौरान अमित सिंह, नेहा श्रीवास्तव, ज्योत्सना, गोल्डी सिंह व नेहा मौजूद रहीं।
प्रश्न: क्या सोचकर आप आईपीएस बनें, आईपीएस बनने से पहले किस क्षेत्र में सुधार करना चाहते थे?- दिव्यांश त्रिपाठी जवाब: जब मैं छोटा था तो सोचता था कि काश सड़क पर होने वाली गुंडई ओर दबंगई को खत्म कर सकूूं। मैं जो चाहता था, ईश्वर ने उसे पूरा किया और मैं आईपीएस ऑफिसर बन गया। जहां रहता हूं, वहां सड़क पर गुंडई नहीं होती है।
प्रश्न: क्या कोई ऐसा केस है जो आप सॉल्व नहीं कर सके हैं?- गौरव मिश्रा जवाब: सारे केस सॉल्व नहीं हो पाते हैं। बहुत से ऐसे केस होते हैं जिसमें पूरी कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती है। ऐसा मेरे साथ भी हुआ है। हार और जीत को जीवन का हिस्सा माना चाहिए।
प्रश्न: समाज में बढ़ते अपराध के लिए कौन जिम्मेदार है?- युवराज पांडेय जवाब: अपराध के लिए पूरी व्यवस्था जिम्मेदार होती है। कोई भी समाज अपराध विहीन नहीं होता है। सब मिलजुल कर काम करें तो निश्चित रूप से अपराध में कमी आएगी।
प्रश्न: पुलिस के काम में राजनीतिक दखलंदाजी ज्यादा होती है, क्या आप भी महसूस करते हैं?- आदित्य पासवान जवाब: ऐसा नहीं है। भारत लोकतांत्रिक देश है। जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है। जनप्रतिनिधि अपनी बात कहते हैं। क्या सही है, क्या गलत यह हमें तय करना होता है। हमारा कर्तव्य है कि जनप्रतिनिधि की समस्या का समाधान करें। उनकी जवाबदेही जनता के प्रति ज्यादा होती है। इसे राजनीतिक दखलंदाजी कहना ठीक नहीं है। सबका काम व दायित्व बंटा है।
प्रश्न: प्रशासनिक सेवा की तैयारी कैसे कर सकते हैं?- दिव्यांश त्रिपाठी जवाब- देखिए, आपके पास बहुत समय है। अभी इंटरमीडिएट करना है, फिर स्नातक व परास्नातक। पढ़ाई के साथ प्रशासनिक सेवा की तैयारी के बारे में सोचना अच्छी बात है लेकिन पहले अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए। जब आप प्रारंभिक पढ़ाई अच्छे से कर लेंगे, तब कोई भी राह आसान हो जाएगी। कुछ भी असंभव नहीं है।
इन विद्यार्थियों ने भी किए सवाल-अंशुमान मिश्रा, कार्तिकेय उपाध्याय, प्रियांशु जायसवाल, नैना, सौम्या उपाध्याय, आरती सिंह, रुद्रेश पाठक, आदित्य पासवान, युवराज मिश्रा।