पूर्वांचल के किसानों ने अगर रुचि दिखाई तो इस क्षेत्र को प्याज की महंगाई से तो निजात मिलेगी ही, किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही गन्ने में लगने वाले पिहिका रोग से भी निजात मिलेगी, जिससे गन्ने की औसत उपज भी बढ़ जाएगी। यह सब कुछ संभव हो जाएगा, केवल गन्ने के साथ प्याज की बोआई से। किसानों को इसके लिए न तो अतिरिक्त खेत की जरूरत होगी और न ही अतिरिक्त संसाधन की। बोआई का तरीका भी कठिन नहीं है।
गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने के लिए शासन के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान पिपराइच से प्रगतिशील किसानों की एक टीम को महाराष्ट्र भेजा गया था। इस टीम का नेतृत्व कर रहे संस्थान के सहायक निदेशक ओमप्रकाश ने बताया कि प्याज अनुसंधान संस्थान राजगुरु नगर, पुणे (महाराष्ट्र) के विशेषज्ञों की एक टीम ने हमारी टीम को ‘गन्ना के साथ प्याज’ की सहफसली खेती को दिखाया। यह अत्यंत ही सरल विधि है। शरदकालीन गन्ना की बोआई नवंबर में होती है। आमतौर पर इस गन्ने की पेड़ी की सिंचाई व गुड़ाई का काम जनवरी के अंत में शुरू होता है। यही समय प्याज की बोआई का होता है। गन्ने की दो क्यारियों के बीच की खाली जगह में प्याज की बोआई कर देने से खेत में खर पतवार कम होंगे। अप्रैल में जब गन्ने के पौधों पर मिट्टी चढ़ाने का वक्त होता है, उस वक्त प्याज निकाली जाती है। लिहाजा यही मिट्टी पौधे की जड़ पर चढ़ाने के काम आ जाएगी। इससे एक ही मजदूरी में किसानों का दो काम हो जाएगा।
प्रति एकड़ साढ़े चार किलो बीज की होगी जरूरत
गन्ने के साथ प्याज की बोआई के लिए प्रति एकड़ साढ़े चार किलो बीज की जरूरत पड़ेगी। प्याज का बीज हर जगह दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा देवरिया में पंजीकृत केंद्र भी है, जहां से किसान प्रमाणित बीज ले सकते हैं। एक किलो बीज की कीमत 2600 रुपये है। बेहन गिराने के 45 से 50 दिन बाद इसकी रोपाई होती है।