ताजा मामला गोला और गगहा थाना क्षेत्र देखा जा सकता है। मां-बेटे की हत्या के बाद निलंबित किए गए दिलीप कुमार सिंह पहले भी लापरवाही के आरोपों से घिरे थे। इसी आरोप में गीडा के थानाध्यक्ष पद से हटाया गया था, लेकिन वह 10 दिनों के अंदर ही गगहा का थानाध्यक्ष बनने में कामयाब हो गए।
कुछ ऐसा ही हाल गोला थानाध्यक्ष पद से लाइन हाजिर किए गए हेमेंद्र का था। वह गोला से पहले हरपुर बुदहट के थानेदार थे। थाने पर प्रदर्शन व घेराव के बाद हेमेंद्र को हटाया गया था। कुछ दिन बाद ही वह गोला के थानाध्यक्ष की कुर्सी पाने में सफल हो गए थे।
केस-1
बेलघाट थाना क्षेत्र में डीजे बजाने को लेकर बवाल हुआ था। चौकी पर हमला करके उत्पात मचाया गया था। इस मामले में तत्कालीन थानेदार भवानी भीख राजभर को लाइन हाजिर कर दिया गया। आरोप था कि बेगुनाह जनता पर भवानी भीख राजभर ने बल प्रयोग किया था। अब वह झंगहा के थानाध्यक्ष हैं।
केस-2
चिलुआताल के मजनू चौकी प्रभारी रहे मनोज राय पर लापरवाही का आरोप लगा और लाइन हाजिर कर दिए गए। कार्रवाई के चंद दिनों बाद ही वह झंगहा थाने में तैनाती पाने में सफल हो गए।
केस- 3
चिलुआताल थाने पर रहे सूर्यभान सिंह पर काम में लापरवाही के आरोप गले। उन्हें लाइन हाजिर किया गया था। कुछ दिनों में ही नई तैनाती भी मिल गई। अब वह चौरीचौरा के थानेदार हैं।
केस-4
पांडेयहाता चौकी इंचार्ज रहे चंदन सिंह पर भी लापरवाही के आरोप लगे थे। उन्हें लाइन हाजिर भी किया गया था। अब चंदन सिंह रामनगर कड़जहां के चौकी इंचार्ज हैं।
केस-5
पीपीगंज थानेदार रहे राजप्रकाश को लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर किया गया था। अव वह गगहा के थानाध्यक्ष बनाए गए हैं। गगहा में पिछले दिनों ही मां-बेटे की हत्या की गई थी। इस आरोप में थानेदार हटे तो राज प्रकाश को जिम्मेदारी मिल गई।
डीआईजी गोरखपुर रेंज राजेश डी मोदक ने बताया कि अगर किसी आरोप में कोई हटाया गया है तो जांच के बाद ही नई तैनाती दी जानी चाहिए। इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। यह मामला देखा जाएगा। नियमानुसार ही कार्रवाई, फिर नई तैनाती की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।