रेती चौक के पास रोड एवं नाली पर लगी दुकाने
- फोटो : अमर उजाला।
रेती चौक : नाले पर दुकान, उसके आगे बाइक
रेती चौक का भी यही हाल है। दुकानों के बाहर नाली पर लोहे के चादर को रखकर उस पर दुकानें सजा दी गई हैं। दोनों साइड में यही हाल होने के बाद चलने के लिए रास्ता भी बमुश्किल आठ फीट ही बचता है। गलती से अगर कोई कार लेकर चला गया तो उसे घंटों परेशान होना तय मानिए। दूसरे दुकानों के बाहर बाइक वाले होते हैं। कई दुकानदार दुकानों के सामने ऑटो खड़ा कराकर सामान उतरवाते और लदवाते हैं। आगे बढ़ने पर एक जूता की दुकान है, उसने तो फ्लाई का स्थायी निर्माण ही नाले पर कर दिया है। हाल यह है कि उसकी दुकान पर जाने वालों तक को मशक्कत करनी पड़ती है।
अलीनगर चौक के पास नाली एवं रोड पर लगी दुकानें
- फोटो : अमर उजाा।
अलीनगर : बिजली की खंभे की आड़ में सड़क तक आ गए दुकानदार
अलीनगर रोड का भी यही हाल है। सेनेटरी की दुकान चलाने वालों ने पानी की नई टंकी को ही सड़क पर रख दिया है। उसमें बड़े-बड़े पाइप रखे जाते हैं। यहां भी नाली पर लोहे की चादर नगर आएगी जो घंटाघर, नखास और रेती पर देखने को मिली। आगे बिजली का खंभा है, जिसकी आड़ में दुकान वहां तक पहुंच गई है। एक बर्तन के दुकानदार ने तो यहां सड़क पर तीन फीट आगे तक बर्तन सजाकर रखा है। दूसरी तरफ पान वाला है, जिसने चारपाई लगाकर सड़क पर कब्जा जमा लिया है। अब सड़क पहले से सकरी है और कब्जा के बाद चलने को छह फीट बच जाए तो खुद की किस्मत समझिए।
बेतियाहाता : दुकान से आठ फीट आगे खंभा, उसके आगे बाइक, छह फीट में चलिए
बेतियाहाता से फिराक चौराहा का भी यही हाल है। यहां पर दवा की दुकान से आठ फीट आगे खंभा और ट्रांसफाॅर्मर लगा है। उसके आगे बाइकें खड़ी हो जाती हैं। फिराक चौराहे से बेतियाहाता चौक के पास तक अतिक्रमण की वजह से पांच फीट का ही रास्ता बचता है। आगे जाने पर एक ट्रांसफाॅर्मर है, जिसकी आड़ में सड़क का इस्तेमाल पार्किंग के लिए होता है। दाहिने साइड देखेंगे तो दवा की हर दुकान के आगे सात फीट की जगह है, लेकिन उसका इस्तेमाल सभी दुकानदार निजी कार्य के लिए करते हैं। आम नागरिकों को इसका कोई फायदा नहीं होता है। उनकी दुकानों पर जाने वालों को भी गाड़ी सड़क पर ही खड़ी करनी होती है।
घंटाघर में रोड एवं नाली पर लगी दुकानें।
- फोटो : अमर उजाला।
घंटाघर बाजार : नाली तक पर जमा लिए हैं कब्जा...लगाते हैं दुकान
पांडेयहाता से घंटाघर और यहां से नखास तक की एक ही समस्या है वह है अतिक्रमण। हाल यह है कि शाहमारूफ की ओर मुड़ने वाले मोड़ से घंटाघर की ओर जैसे ही आगे बढ़ेंगे, दोनों ही साइड की दुकानदारों ने आगे बढ़कर कब्जा कर लिया है। नाली के ऊपर लोहे का चादर डालकर उस पर दुकानें लगाई गईं हैं, इसके बाद चलने के लिए जगह महज आठ फीट ही बचती है। कुछ यही हाल घंटाघर चौराहे पर भी है। यहां पर खंभे की आड़ लेकर लोगों ने दुकान को आगे बढ़ाया है और फिर इसके आगे बाइकें खड़ी होती हैं। अब जो जगह बचती है, उसमें वाहन महज रेंगते ही हैं। घंटाघर से नखास की ओर जाने वाले रास्ते का भी यही हाल है।