गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की महायोजना 2031 के प्रारूप पर आई आपत्तियों की सुनवाई के दौरान लोगों ने मांग की कि जहां घर बन चुके हैं, वहां प्रस्तावित कूड़ा प्रबंधन भू उपयोग को बदला जाए।
महायोजना-2031 के प्रारूप पर आईं आपत्तियों पर सुनवाई मंगलवार को भी जारी रही। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में एक हजार से अधिक लोगों ने अपनी बात रखी। जंगल धूसड़ व कुछ अन्य क्षेत्रों से आए लोगों ने कूड़ा प्रबंधन क्षेत्र के भू उपयोग पर आपत्ति जताई।
उनका कहना था कि जहां आवास बन चुके हैं, वहां कूड़ा प्रबंधन भू उपयोग प्रस्तावित किया गया है। इसे बदलना उचित होगा। सुनवाई कर रहे जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि आपत्ति पर विचार कर नियमानुसार जनहित में निर्णय लिया जाएगा।
महायोजना 2031 के प्रारूप पर 11 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जीडीए ने एक प्रवृत्ति की आपत्तियों को एक साथ कर सुनवाई शुरू की है। अब तक करीब आठ हजार लोगों की सुनवाई हो चुकी है। मंगलवार को सुबह से ही जीडीए उपाध्यक्ष, विशेष कार्य अधिकारी/एसडीएम प्रदीप सिंह, अपर आयुक्त एवं जीडीए के सहायक संपत्ति अधीक्षक इंद्रजीत सिंह ने मामले की सुनवाई की।
कई लोगों ने आवास बनने का हवाला देकर हरित क्षेत्र हटाने का अनुरोध किया। महायोजना में प्रस्तावित सड़क से सैकड़ों मकान टूटने की आशंका भी लोगों की ओर से समिति के समक्ष रखी गई। ऐसे क्षेत्र से आए लोगों का कहना था कि अलग से चौड़ी सड़क बनाने का कोई मतलब नहीं है। कई लोगों के आवास तोड़ने पड़ेंगे। जीडीए उपाध्यक्ष ने इस आपत्ति को नोट कर लोगों को निस्तारण का भरोसा दिलाया।
विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों को भू उपयोग पार्क करने पर आपत्ति थी। हाईवे के किनारे जमीन खरीदने वाले भी अपनी बात रखने आए थे। वे जानना चाहते थे कि अपनी जमीन का उपयोग कर सकेंगे या नहीं। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।