कोराना संक्रमण से मुक्त लोग अब आसानी से प्लाज्मा दान कर सकेंगे। फातिमा अस्पताल के बाद अगले सप्ताह से यह सुविधा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी उपलब्ध होगी। बीआरडी में लाई गई एफेरेसिस मशीन के लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया गया है। लाइसेंस मिलते सुविधा शुरू हो जाएगी।
पैथोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. शैला मित्रा ने बताया कि यह मशीन प्लेटलेट्स की कमी से जूझने वाले डेंगू, ल्यूकेमिया, एप्लास्टिक, एनीमिया आदि के मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी। कोरोना मरीजों को चढ़ाया जाने वाला प्लाज्मा इस मशीन से आसानी से निकाला जा सकेगा। इस उपकरण के लगने से मरीज को प्लेटलेट्स के लिए कई यूनिट रक्त की जरूरत नहीं पड़ेगी। नतीजतन अधिक रक्तदाताओं को को तलाशने की आवश्यकता नहीं होगी। डॉ. शैला ने बताया कि प्लेटलेट्स या प्लाज्मा निकाल कर मशीन शेष रक्त को दानदाता के शरीर में लौटा देगी।
एक यूनिट रक्त से निकाल सकेंगे पांच गुना ज्यादा प्लेटलेट्स
ब्लड बैंक के प्रभारी डा. राजेश कुमार राय ने बताया कि एफेरेसिस मशीन एक दानदाता के रक्त से प्लेटलेट्स या प्लाज्मा अलग करने और बाकी रक्त दानदाता के शरीर में वापस लौटाने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लेती है। साधारण रक्तदान में एक यूनिट रक्त से मात्र पांच हजार प्लेटलेट्स व 160 मिलीलीटर प्लाज्मा निकलता था। इस मशीन के जरिए एक यूनिट रक्त से 30 हजार प्लेट्लेट्स व 450 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकेगा।