इन लैबों का लोकार्पण
इम्युनोलॉजी: वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता और उसके प्रभाव पर शोध होंगे।
मॉलीक्यूलर बायोलॉजी: जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। अभी जीन सीक्वेसिंग के लिए नमूने दिल्ली व पुणे भेजे जाते हैं।
मॉइकोलॉजी: फंगल की जांच सहित शोध हो सकेगा।
मेडिकल इंटेमोलॉजी: डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफ्लाइटिस आदि के वाहक कीटों पर शोध होगा।
नान कम्युनिकेबल डिजीज: मधुमेह व हाइपरटेंशन के कारणों की जांच की जाएगी।
माइक्रोबायोलॉजी: वायरस और बैक्टीरिया पर शोध होंगे।
सोशल विहैवियर स्टडी: मानसिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा।
हेल्थ कम्युनिकेशन: बीमारियों की रोकथाम के उपायों के प्रचार-प्रसार का प्रमुख जरिया।
इंटरनेशनल हेल्थ पालिसी: इसके जरिए विश्व स्तर की होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा।
निदेशक डॉ रजनीकांत ने कहा कि जीन मैपिंग से लेकर वैक्सीन की क्षमता, नई बीमारियों पर शोध, वायरस और बैक्टीरिया की पहचान, मानसिक बीमारियों पर शोध जैसे बड़े काम हो सकेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि लैब में जीनोम सीक्वेसिंग जांच की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसकी डिमांड पूरे विश्व भर में है।