गोरखपुर जिले में विकास कार्यों के लिए अब पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें दूसरी जगह (ट्रांसप्लांट) लगाया जाएगा। कोई भी निर्माण कार्य तभी शुरू होगा, जब उस जगह के पेड़ों को दूसरी जगह लगा दिया जाएगा। ट्रांसप्लांट करने वाली एजेंसी को सुनिश्चित करना होगा कि जो पेड़ लगाए जाएंगे, उनमें से 80 फीसदी जिंदा रहें। इस संबंध में शासनादेश जारी हो गया है। सोमवार से इसे लागू कर दिया जाएगा।
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि पेड़ों को बचाने के साथ पर्यावरणीय ऑक्सीजन को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले जब किसी सड़क को चौड़ी करना होता था या कोई नई सड़क बनानी होती थी तो उस राह में आने वाले पेड़ों को वन विभाग की अनुमति के बाद काट दिया जाता था। हालांकि, इन पेड़ों के बदले दूसरी जगह पर उतने ही पेड़ लगाने की शर्त होती थी, लेकिन इससे मकसद पूरा नहीं हो पाता था। क्योंकि, पौधे लगाने और उन्हें तैयार होने में लंबा वक्त लग जाता था। अब विकास कार्यों के लिए पेड़ों को काटने के बजाए, दूसरी जगहों पर लगा दिया जाएगा। इस तरह पेड़ को तैयार होने में जो समय लगता था उसकी बचत होगी। इस बीच पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्री ट्रांसप्लांटेशन मुश्किल नहीं है, केवल जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
पेड़ ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी बातें
पेड़ को दूसरी जगह लगाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। मसलन, किसी पेड़ को एक जगह से दूसरी जगह लगाने से पहले उसके जनरल हेल्थ को जान लें। पेड़ के स्वरूप को पहचान लें। उसकी जड़ों के आकार-प्रकार को समझ लें। रूट सिस्टम किस तरह का है, इसे जान लें। जिस जगह पेड़ को लगाया जाना है वह कैसी है, कितने पेड़ लगाए जा सकते हैं। जिस जगह पर पेड़ को लगाया जाना है वह कितनी सुरक्षित है। पेड़ के अनुकूल ही मिट्टी और जगह आदि का चयन करें, ताकि पेड़ को अपनी खुराक लेने और विकास करने में कोई दिक्कत न हो।
चिड़ियाघर और मेडिकल रोड पर लाए जा चुके हैं पेड़
डीएफओ ने बताया कि चिड़ियाघर के उद्घाटन से पहले बाहर से लाकर पेड़ लगाए गए हैं। यह विधि सफल रही है। लगभग 30 पेड़ थे, जिन्हें ट्रांसप्लांट किया गया था। इसी तरह मेडिकल कॉलेज की सड़क चौड़ी करते समय भी दूसरी जगह से लाकर पेड़ लगाए गए थे।
कब और किस मौसम में करें पेड़ों को ट्रांसप्लांट
- कोनीफर: पत्ते कोने या नीडल की तरह दिखने वाले पेड़ कोनीफर होते हैं। पाइन, सीडार जिसे क्रिसमस ट्री कहते हैं वह इसी श्रेणी में आते हैं। इन्हें फरवरी से अप्रैल और सितंबर से अक्तूबर के बीच ट्रांसप्लांट किया जाना चाहिए।
- सदा हरेभरे रहने वाले पेड़ों को मार्च से अप्रैल माह के बीच दूसरी लगाया जा सकता है।
- जिन पेड़ों के पत्ते झड़ते हैं उन्हें अक्तूबर-दिसंबर व मार्च से अप्रैल में लगाया जाना चाहिए।