गोरखपुर के डीएम के. विजयेंद्र पांडियन। (फाइल)
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गोरखपुर के चौरीचौरा के मलमलिया की जगह अब आयुष विश्वविद्यालय की नींव दूसरी जगह पड़ेगी। मलमलिया में चिह्नित जमीन पर सीलिंग के चलते हाई कोर्ट में वाद दाखिल हो जाने से दूसरी जमीन तलाशी जा रही है। प्रशासन को सदर तहसील स्थित जंगल डुमरी नंबर दो के पास बासस्थान में मौजूद करीब 161 एकड़ जमीन पसंद आई है। प्रशासन, जल्द ही इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजेगा।
शासन ने पिछले साल ही गोरखपुर में प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय खोलने का फैसला किया। फरवरी 2020 में मलमलिया में जमीन भी चिन्हित कर ली गई। यहां करीब 350 एकड़ जमीन थी, जिसमें से 24.29 हेक्टेयर यानी 60 एकड़ आयुष विश्वविद्यालय के नाम कर दी गई थी।
कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट खुला तो जमीन पर दावा करने वाले कुछ स्थानीय काश्तकारों ने सीलिंग के मामले को लेकर वहां वाद दाखिल कर दिया। एक फरवरी को मामले में पहली सुनवाई होनी है।
पहले प्रशासन ने न्यायालय में पैरवी कर वाद खत्म कराने की तैयारी की थी। लेकिन शासन की महत्वपूर्ण परियोजना होने की वजह से प्रशासन अब किसी भी तरह के असमंजस की स्थिति नहीं बनने देना चाहता। यही वजह है कि जल्द से जल्द बिना विवाद वाली जमीन तलाशने का फैसला किया गया।
शासन को पूरे मामले की जानकारी देने के साथ ही प्रशासन, पिछले तीन दिनों से जमीन की तलाश कर रहा था, जो बुधवार को बासस्थान वाली जमीन के तौर पर फिलहाल के लिए खत्म हो गई है। कोई पेंच नहीं फंसा तो यहीं पर आयुष विश्वविद्यालय बनाने पर निर्णय किया जा सकता है।