लखनऊ जाने वाले मरीजों को करते हैं टारगेट, फिर रास्ते में देते हैं बेच
पुलिस ने आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा
सीएमएस ने पकड़ा, नोडल अफसर बोले- 24 घंटे में होगा निष्कासन
अमर उजाला ब्यूरो
गुलरिहा (गोरखपुर)। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज को छोड़ने आए एक सरकारी एंबुलेंस से मरीज की खरीद-फरोख्त की कोशिश का मामला सामने आया है। सीएमएस ने आरोपियों को पकड़कर पुलिस बुला ली। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि दोनों संविदा कर्मचारी लखनऊ रेफर किए गए मरीजों को निशाना बनाते हैं। इनकी प्राइवेट एंबुलेंस से भी सांठगांठ रहती है। रास्ते में सुनसान जगह देखकर प्राइवेट एंबुलेंस को बुलाते हैं और मरीज को उसमें शिफ्ट कर देते हैं। इसके बदले में तय रकम लेकर लौट जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब तीन बजे कैंपियरगंज सीएचसी से एक मरीज को लेकर 108 नंबर एंबुलेंस से चालक राकेश गुप्ता व ईएमटी सुरेश, निवासी धानी महराजगंज मेडिकल काॅलेज पहुंचे थे। मेडिकल काॅलेज कैंपस में बाबा राघव दास प्रतिमा के पास एक मरीज के तीमारदार से एंबुलेंस के कर्मचारी लखनऊ जाने के लिए बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान नेहरू चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पहुंचे और कर्मचारियों के संदिग्ध लगने पर दोनों को पुलिस को सौंप दिया।
मेडिकल पुलिस चौकी इंचार्ज विवेक मिश्रा ने सरकारी एंबुलेंस के हेड ऑफिस लखनऊ को सूचना दी। उन लोगों से कुछ जानकारी पुलिस को मिली है, जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है। नोडल अधिकारी लखनऊ शशांक त्रिपाठी ने पुलिस को बताया कि 24 घंटे के भीतर निष्कासन की कार्रवाई कर दी जाएगी। मेडिकल काॅलेज चौकी की पुलिस ने दोनों एंबुलेंस कर्मियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ दिया।
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जिला अस्पताल में पुलिस चौकी के लिए जगह मिली
गोरखपुर। जिला अस्पताल में भी पुलिस चौकी के लिए जगह मिल गई है। दरअसल, सरकारी अस्पताल से मरीजों को बेचे जाने का मामला सामने आने के बाद ही कमिश्नर अनिल ढींगरा ने बैठक की थी। इसमें एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पुलिस चौकी की जरूरत बताई थी, तभी आदेश हुआ था, लेकिन जगह नहीं मिल पा रही थी। अब अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी परिसर में ही पुलिस चौकी के लिए जगह दे दी है। खबर है कि जल्द ही वहां पर पुलिस चौकी बन जाएगी। ब्यूरो