गोरखपुर। राष्ट्रीय सुरक्षा की जंग अब सिर्फ सीमा पर नहीं लड़ी जा रही। साइबर स्पेस, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दुष्प्रचार भी देश की सुरक्षा के नए मोर्चे बन चुके हैं। महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में शिक्षक उन्मेष योजना के तहत सोमवार को ‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में रक्षा अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य विवेक विश्वकर्मा ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ अब केवल सीमा और सैन्य शक्ति की सुरक्षा नहीं है। इसमें आर्थिक मजबूती, तकनीकी क्षमता, राजनीतिक स्थिरता, सामाजिक सद्भाव और नागरिक सुरक्षा भी शामिल हैं। आधुनिक युद्ध में साइबर हमले और सूचना युद्ध बिना पारंपरिक रणभूमि के भी देश के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ गलत और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों का दुरुपयोग भी सुरक्षा के लिए चुनौती है। इसके अलावा आतंकवाद, सीमा विवाद, समुद्री सुरक्षा, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी पारंपरिक चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
उन्होंने जल-ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महामारी और खाद्य सुरक्षा को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता, सुरक्षित डिजिटल ढांचा और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सरकार, सेना और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। सजग और जिम्मेदार नागरिक भी इसकी महत्वपूर्ण कड़ी हैं। कार्यक्रम का संयोजन शिक्षक उन्मेष योजना के संयोजक डॉ. सुबोध कुमार मिश्रा ने किया।