रेलवे के करीब 10 से 15 हजार रेलकर्मियों को अब आरओ जैसा शुद्ध पानी मिलेगा। इसके लिए सभी बोरिंग के पास ऑटो बैक्टीरियोलॉजिकल ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा। इससे स्वत: क्लोरीनेशन तो होगा ही, पानी में टीडीएस (टोटल डिजाल्वड सालिड्स) और पीएच वैल्यू स्टैंडर्ड मानक के अनुसार हो जाएगा।
इसकी शुरुआत गोरखपुर मुख्यालय से की गई है, 10 प्लांट लगाए जा रहे हैं। इससे सभी दफ्तर और कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति की जाएगी।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन के सामने पानी की गुणवत्ता को लेकर कई बार मामले लाए गए। यूनियन के लोगों ने भी इसे जोरशोर से उठाया। रेल प्रशासन ने कई जगहों पर आरओ लगाए, लेकिन आरओ के बार-बार खराब होने से परेशानी बनी रही।
इस समस्या को देखते हुए रेल प्रशासन ने कानपुर की फर्म मरकरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड से अनुबंध किया है। यह फर्म 99 लाख 8 हजार रुपये की लागत से 10 प्लांट लगाएगी। इस प्लांट के माध्यम से बोरिंग से निकलते ही पानी को शुद्ध करके टंकी में भेजा जाएगा।
पहले चरण में अभी रेलवे की जटेपुर, बौलिया, बिछिया और डेयरी कॉलोनी, आफिसर्स कॉलोनी और मुख्यालय के सभी दफ्तरों में पानी की आपूर्ति होगी। दूसरे चरण में रेलवे स्टेशन पर भी ऑटो बैक्टीरियोलॉजिकल ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे।