नगर निगम में उपसभापति का चुनाव जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी सामाजिक संतुलन की रणनीति के तहत इस बार दलित चेहरे पर दांव लगा सकती है। संख्या बल के अभाव में समाजवादी पार्टी पहले ही मुकाबले से बाहर मानी जा रही है।
नगर निगम अधिनियम के अनुसार, उपसभापति का चुनाव पांच अगस्त तक होना है लेकिन इसकी प्रक्रिया जुलाई के अंतिम सप्ताह में पूरी कराए जाने की तैयारी है। चुनाव की आहट के साथ ही निगम सदन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
खास बात यह है कि पिछले 36 वर्षों में इस पद के लिए 19 चुनाव हो चुके हैं लेकिन अब तक किसी दलित पार्षद को उपसभापति बनने का अवसर नहीं मिला।
हाल ही में हुए नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा ने पुराने चेहरों के बजाए नए पार्षदों को मौका देते हुए दो पिछड़ा, दो दलित और एक सामान्य वर्ग के सदस्य को शामिल कर सामाजिक संतुलन का संदेश दिया था। अब माना जा रहा है कि यही रणनीति उपसभापति चुनाव में भी दोहराई जा सकती है।
पद के लिए दो महिला पार्षद भी दावेदारी कर रही हैं, जिनमें एक पिछड़ा वर्ग और दूसरी सामान्य वर्ग से हैं। वहीं, दलित वर्ग के एक वरिष्ठ पार्षद भी मजबूत दावेदार बताए जा रहे हैं। वह तीन बार पार्षद रह चुके हैं, जबकि उनकी पत्नी भी एक कार्यकाल तक पार्षद रह चुकी हैं। हालांकि उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला भाजपा संगठन और शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद ही होगा।