- धारा 317: माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
- सजा : सात साल की सजा या फिर जुर्माना या कैद, जुर्माना दोनों
- धारा 318 : पैदाइश छुपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित या मृत फेंकना अपराध है।
- सजा : दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों
डीजीपी का आदेश फिर भी करते हैं आनाकानी
कहीं पर भी नवजात मिलने पर एफआईआर दर्ज करने का डीजीपी का आदेश भी थानेदार दरकिनार कर देते हैं। यह हाल तब है जब जिले के चौरीचौरा थाने में दो, गोला थाने में एक एफआईआर पहले दर्ज हो चुकी है। इन मामलों में पुलिस खुद वादी बनी थी। अब एक बार फिर नवजात मिलने पर पुलिस तहरीर ना आने का बहाना बनाकर केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।