गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 2022-23 के शोध छात्रों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उनका प्रवेश तो सत्र 2022-23 में हुआ था, लेकिन अब उनसे 2023 की फीस संरचना के अनुसार शुल्क जमा करने को कहा जा रहा है। शोधार्थियों ने इसकी शिकायत कुलसचिव से की है।
विश्वविद्यालय में 2023 में सभी पाठ्यक्रमों के साथ ही पीएचडी की फीस में बढ़ाई गई थी। साथ ही इसे सभी विद्यार्थियों पर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया, लेकिन कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद यह फैसला लिया था कि इसे पुराने विद्यार्थियों पर लागू नहीं किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों ने बढ़ी हुई फीस जमा की थी उसे अगले सेमेस्टर में समायोजित कर दिया गया था।
शोघार्थियों का कहना है कि उन्होंने 2022-23 की प्रवेश विवरणिका देखकर प्रवेश लिया था। भले उनका प्रवेश देरी से 2023 में हुआ लेकिन वे सत्र 2022-23 के शोधार्थी हैं। प्रवेश के समय भी उन्होंने बढ़ी हुई फीस जमा की थी। सभी पाठ्यक्रमों से यह फैसला वापस ले लिया गया, लेकिन पीएचडी से ऐसा नहीं हुआ। अब दूसरे सेमेस्टर की फीस बढ़कर आ रही है। नॉन प्रैक्टिकल विषय की फीस एक हजार से बढ़कर करीब साढ़े पांच हजार हो गई है, वहीं प्रैक्टिकल की लगभग 1400 से बढ़कर छह हजार हो गई है।
शुल्क बढ़ोतरी की समस्या को लेकर कुछ शोधार्थी आए थे। उनका कहना था कि उनकी फीस पहले के आधार पर ली जाए। मामले पर गंभीरता पूर्वक विचार कर कोई फैसला लिया जाएगा।
-प्रो. शांतनु रस्तोगी, कुलसचिव