नेपाल पीएम केपी शर्मा ओली। (फाइल फोटो)
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नेपाल में तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटक्रम को लेकर मधेशी नेताओं की अगल-अलग राय है। कोई प्रधानमंत्री ओली को कुर्सी के मोह में फंसना बता रहा है तो किसी को ओली का देश के नाम होने वाले संबोधन का इंतजार है।
मधेशी नेताओं ने कहा कि माओवादियों को नेकपा में विलय के बाद ढ़ाई साल सरकार चलाने पर समझौता हुआ था। ऐसे में प्रधानमंत्री को पद से हटते हुए प्रचंड को मौका देना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री ने इस समझौते को भी दरकिनार कर दिया। वर्तमान में नेपाल की राजनीति को लेकर कुछ सटीक कह पाना मुश्किल होगा। पीएम को जनता की चिंता नहीं है।
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रूपनदेही जिले के राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि नेपाल की राजनीति ही अलग है। स्थाई समिति की बैठक होने वाली है। लेकिन प्रधानमंत्री ने बैठक स्थगित कर देश के नाम संबोधित करने का फैसला लिया है। अब यह देखना है कि वह देश की जनता से क्या कहना चाहते हैं। हो सकता है कि मध्यावधी चुनाव हो।
मर्चवार के वरिष्ठ मधेशी नेता इस्लाम खान ने बताया कि प्रधानमंत्री कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते। मधेशियों के हित को लेकर प्रधानमंत्री ने कुछ खास नहीं किया है। देश के नाम संबोधन के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि वह इस्तीफा देंगे या चुनाव होगा।
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समाजवादी नेता महेंद्र यादव ने बताया कि हर बात के लिए प्रधानमंत्री की भारत विरोधी टिप्पणी ठीक नहीं है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री को समझौते के आधार पर अब इस्तीफा देना चाहिए। लेकिन उनके रूख के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं मिल पा रही है।