नई महायोजना के प्रारूप को मंजूरी मिलने के पहले ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) का सीमा विस्तार हो चुका है। अब जीडीए की सीमा में 319 राजस्व गांव हो गए हैं। नई महायोजना में विस्तारित क्षेत्र के विकास का भी खाका खींचा गया है, लेकिन महायोजना लागू होने से पहले जो निर्माण हो गए हैं, उनपर कोई खतरा नहीं है। नए निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना जरूरी होगा।
दरसअल महायोजना के प्रारूप को स्वीकृति मिलने के बाद से ही नए विस्तारित क्षेत्र के लोगों में मानचित्र स्वीकृत कराने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इसे लेकर जीडीए ने स्थिति साफ की है कि महायोजना लागू होने के बाद नए विस्तारित क्षेत्र में होने वाले निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना जरूरी होगा। सीमा विस्तार के बाद जीडीए में शामिल गांवों की संख्या 319 हो गई है।
अधिकतर क्षेत्रों के लिए महायोजना का प्रारूप जीडीए बोर्ड की बैठक में रखा जा चुका है। कुछ अन्य हिस्सों के लिए दूसरे चरण में प्रारूप रखा जाएगा। लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि जो मकान पहले से बने हैं, उनका क्या भविष्य होगा? एक शासनादेश के मुताबिक महायोजना से पहले लोगों को अपने भवनों के उपयोग की जानकारी प्राधिकरण को देनी थी। इस शासनादेश को बोर्ड में रखकर व्यवस्था में शामिल करना था लेकिन जीडीए में इसे लागू नहीं किया जा सका।
कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि जिन निर्माणों का मानचित्र अन्य संस्थाओं से पास होगा, उन्हें नियमित कर दिया जाएगा लेकिन गोरखपुर में अधिकतर निर्माणों का मानचित्र पास नहीं था। जिला पंचायत गोरखपुर ने कुछ दिन पहले ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण के लिए मानचित्र पास करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस तरह ग्रामीण क्षेत्र में इससे पहले मानचित्र पास कराने का कोई तरीका नहीं था। जीडीए के सचिव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि महायोजना से पहले जो निर्माण हो चुके हैं, उन्हें उसी स्थिति में रखा जाएगा