देवरिया जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर मुड़ेरा बुजुर्ग चौराहे से शेरों के मुख वाला गेट से होकर जाने वाले मार्ग पर अहिलवार बुजुर्ग के निकट अहिल्यापुर देवी का स्थान नवरात्र में लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक देवी के उपासक यहां आकर दर्शन पूजन एवं नारियल चुनरी चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। मान्यता है कि आने वाले हर साधक की मनौतियों को देवी अवश्य ही पूरा करती हैं।
देवरिया व भटनी रेलवे स्टेशनों के बीच में पड़ने वाले अहिल्यापुर रेलवे स्टेशन से करीब तीन किमी आगे स्थित अहिल्यापुर दुर्गा मंदिर का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि आजादी के पूर्व तक आधी दुनिया जिस ब्रिटिश हुकूमत के आगे नतमस्तक थी, उस अंग्रेजी शासन को भी आदि शक्ति मां दुर्गा के समक्ष शीश झुकाना पड़ा।।
मां ने ऐसे दिखाया था चमत्कार
उस दौरान गोरखपुर से छपरा तक ब्रिटिश हुकूमत की देखेरख में जब रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी तो रेलवे लाइन को, आज जहां मंदिर है, उस स्थान पर मां के पिंड से होकर गुजारना था। पिंड के बीचोंबीच से दिन में रेल पटरी बिछाई गई। अगली सुबह में वह पटरी उखड़ी हुई मिलती थी, यह क्रम कई दिनों तक चला।
इसे लेकर अंग्रेज अफसरों के मन में संदेह हो गया कि स्थानीय लोग ऐसा कर रहे हैं। ऐसे में अंग्रेज अफसर रात में रुकने का मन बना लिए। आधी रात में स्वप्न में मां दुर्गा ने ऐसा करने से मना किया और तो अंग्रेज अफसर दंग रह गया और उच्चाधिकारियों को जानकारी के बाद पटरी को 100 मीटर से अधिक दूरी से होकर बिछाया गया।
साथ ही अंग्रेज अफसरों ने सकुशल रेलवे लाइन का निर्माण कार्य संपन्न हो सके, इसके लिए उन्होंने मां के शक्तिपीठ का जीर्णोद्धार कार्य भी कराया। तभी से शक्तिपीठ की महत्ता देश से लेकर प्रदेश के विभिन्न भागों में फैल गई। शारदीय व वासंतिक नवरात्र में दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष श्रीपति नारायण मिश्र व सचिव सतचंडी मिश्र ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर यहां रामलीला सहित अन्य विभिन्न प्रकार के आयोजन किए जाते हैं। हालांकि इस बार कोरोना के चलते इन कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है