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National Bone and Joint Day: कूल्हे और घुटने पर भी हो रहा है कोरोना का वार, विशेषज्ञों ने दी ये खास सलाह

Wed, 04 Aug 2021 01:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

आर्थोपेडिक एसोसिएशन करेगा लोगों को आगाह। कोरोना बीमारी के बीच बेहद सतर्क रहने की है जरूरत। विशेषज्ञों के मुताबिक सही समय पर नहीं हुआ इलाज तो मरीजों के कूल्हे, गांठ जैसी गंभीर बीमारी का बढ़ सकता है खतरा।
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डॉ. अमित मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के डॉ. अमित ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद मरीजों में पोस्ट कोविड माइल्जिया की शिकायतें लगातार आ रही हैं। कमर, पूरे पैर, घुटने और कूल्हों में बेतहाशा दर्द (फटने जैसा) की शिकायत लेकर मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इसमें कई ऐसे मरीज भी मिले हैं जिनके घुटने और कूल्हे का ऑपरेशन तक करना पड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो ऐसे मरीजों के कूल्हे, गांठ जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
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चार अगस्त यानी आज के दिन नेशनल बोन एंड ज्वाइंट डे मनाया जाता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और आर्थोपेडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 15 प्रतिशत मरीज पोस्ट कोविड माइल्जिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनके मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। यह समस्या सामान्य वायरल इंफेक्शन में भी मरीजों में होती है। लेकिन कोरोना बीमारी में खून की धमनियों में हाइपरकोग्यूबिलिटी (खून की धमनियों में रक्त का का थक्का जम जाना) मिलता है। इससे कूल्हों और घुटने के खराब होने की आशंका सर्वाधिक होती है। कोविड के बाद कई मरीजों के तो कूल्हे और घुटने भी खराब हो चुके हैं।

कहा कि कोरोना बीमारी के बीच बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। अवस्कूलरनेक्रोसिस बीमारी में लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की वजह से है हड्डियों में कमजोरी और दर्द रह सकता है। इस बीमारी से हड्डियों में ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका भी है जो कूल्हे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोरोना वायरस से कूल्हे खराब होने के मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसी स्थिति में लोग अधिक से अधिक व्यायाम करें और विटामिन-डी का सेवन करें।
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ऐसे कर सकते हैं अपना बचाव
कोरोना संक्रमण के दौरान पानी पर्याप्त पीयें ताकि डिहाइड्रेशन न होने पाए। खून पतला करने वाली दवा अब प्रोटोकॉल में है, इसलिए कोविड मरीजों को यह दवा लिखी जा रही है। इसे जरूर लें। योग-व्यायाम करते रहें। यह बीमारी हो जाने पर भी खून पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं। उसकी डोज का मानक तय है। इसके अलावा नसों व मांसपेशियों को आराम पहुंचाने की भी दवाएं भी दी जाती हैं।
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