व्यापारी से 50 लाख रुपये छीनने के मामले में फरार आरोपी चल रहे तीनों आरोपियों को उच्च न्यायालय से राहत मिल गई है। न्यायाधीश सिद्धार्थ और सुरेंद्र सिंह की बेंच ने तीनों की गिरफ्तारी पर त्वरित रोक लगा दी है। सरकारी अधिवक्ता को सात मई तक का समय दिया है। कहा है कि केस की फ्रेश फाइल लेकर कोर्ट में रखें।
गोरखपुर कोर्ट में आरोपियों के अधिवक्ता राहुल तिवारी ने शनिवार को कोतवाली के पैरोकार के साथ कोर्ट में अरेस्ट स्टे दाखिल कर दिया।
आरोपी दरोगा चौकी इंचार्ज के अलावा पुलिस ने तीन अज्ञात पर भी केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने तीन नामों को बढ़ाते हुए प्रचंड प्रताप सिंह, विशाल तिवारी और मुकेश को आरोपी बनाया। इनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू भी जारी किया गया था।
क्राइम ब्रांच, एसओजी और सर्विलांस की टीमें इनकी गिरफ्तारी में जुटी थीं, लेकिन 27 दिनों तक इन्हें नहीं खोज सकीं। इसी बीच तीनों ने हाईकोर्ट की शरण ली और अरेस्ट स्टे हासिल किया। पैरवी कर रहे नितिन चंद्र मिश्रा की दलीलों को सुनने के बाद सरकारी वकील से भी पक्ष मांगा गया, लेकिन वे नहीं दे सके।
वहीं, आयकर विभाग ने व्यापारी नवीन श्रीवास्तव के घर समन चस्पा कर बयान के लिए संपर्क किया पर बयान दर्ज नहीं हो सका। पुलिस और आयकर विभाग इसे हवाला की रकम ही मान रही है। आयकर विभाग के पास जबतक नवीन श्रीवास्तव का लिखित बयान नहीं होगा, तब तक जब्त की गई रकम को आयकर विभाग अपने कब्जे में नहीं ले पाएगा।
पकड़ा गया 44 लाख रुपये कोतवाली के मालखाने में पड़ा है। इधर, आयकर विभाग की तरफ से कोतवाली पुलिस को भी नवीन श्रीवास्तव को हाजिर करवाने का एक समन भेजा गया।