स्वतंत्र सिंह कुर्सी की जगह बनाए हैं टायरों की सीट
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आमतौर पर लोग खराब हो चुके वाहनों के टायर या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, लेकिन मशरूम उत्पादक स्वतंत्र सिंह ऐसा नहीं करते। वह खराब टायरों से अपने शोरूम की शोभा बढ़ा रहे हैं। इनके बैठने की सीट भी टायरों से बनी है। पौधों की हिफाजत टायरों से बने ट्रीगार्ड से करते हैं।
भलुअनी ब्लॉक के सोनाड़ी गांव निवासी स्वतंत्र सिंह प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। दो साल पहले जब जिले में कहीं मशरूम का उत्पादन नहीं होता था। तब उन्होंने हिमाचल प्रदेश सोलन के कुंभ निदेशालय जाकर मशरूम की बारीकियां सीखीं।
वह मशरूम से निर्मित दर्जनों प्रकार के उत्पाद तैयार करते हैं। जिसमें मशरूम का चाय और पकौड़ा लोगों को खूब भा रहा है। इसके अलावा वह मशरूम का बरगर, चाऊमीन, अचार, मुरब्बा भी बनाते हैं।
स्वतंत्र सिंह ने विकास भवन गेट के बगल में मशरूम निर्मित उत्पादों का शोरूम खोला है। उनके बैठने का अंदाज भी अन्य लोगों से अलग है। वह प्लास्टिक, लोहे या काठ की कुर्सी पर नहीं बैठते। वाहनों के खराब टायरों को अलग-अलग रंगों से पेंट कर सीट तैयार किए हैं।
स्वतंत्र सिंह बताते हैं कि ज्यादातर लोग खराब हुए टायरों सर्दी के दिनों अलाव तापने के काम में लाते हैं। इससे वातावरण दूषित होता है। मैं इसे फेंक देता तो दूसरे लोग जला देते, इसलिए मैंने इसे कलर करके सीट बना लिया। बाकी टायरों को रखकर ट्रीगार्ड बना दिया हूं। इसे शोरूम में रखने का उद्देश्य दूसरों को सीख देना है।
आठ हजार लोगों को कर चुके हैं प्रशिक्षित
स्वतंत्र सिंह ने दो साल पहले मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। अब तक करीब आठ हजार लोगों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। इनसे प्रशिक्षण लेकर 12 गांवों में तीन-तीन समूह की महिलाएं मशरूम उत्पादन कर रही हैं। आज जिले में रोजाना पांच क्विंटल मशरूम का उत्पादन हो रहा है।