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सपने हुए चकनाचूर: नीट परीक्षा रद्द होते ही गोरखपुर के छात्रों में निराशा, बोले- कब तक झेलेंगे सिस्टम की नाकामी

Wed, 13 May 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

नीट परीक्षा रद्द होने की खबर आते ही गोरखपुर समेत पूरे देश के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों में निराशा, गुस्सा और चिंता का माहौल है। सालभर से दिन-रात तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक और फिर परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कई छात्र डिप्रेशन में हैं तो कई अभिभावक बच्चों के करियर को लेकर चिंतित हैं। गोरखपुर के कोचिंग हब बेतियाहाता और गोलघर में सन्नाटा पसरा है। छात्रों का कहना है कि मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से नुकसान हो रहा है।
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नीट परीक्षा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) रद्द होने से अभ्यर्थियों में निराशा और गुस्सा के साथ भविष्य को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सबसे बड़ी समस्या उन छात्रों के साथ है जो निम्न मध्यमवर्गीय या गरीब परिवारों से हैं और शहर में रहकर तैयारी करते थे। अच्छा पेपर होने के बाद रिजल्ट का इंतजार कर रहे उन अभ्यर्थियों को अब फिर से तैयारी करनी होगी।
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शहर में किराए पर कमरा लेकर तैयारी करने वाले छात्र आयुष ने बताया कि उसके पिता मुंबई में कमाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बाद भी उसे हर सुविधा उपलब्ध कराई गई। पेपर बहुत अच्छा हुआ था। घर वालोें को बहुत आस थी। अब दोबारा तैयारी के लिए फिर खर्च लगेगा।

तैयारी कर रहे छात्र आदित्य का कहना था कि उसकी मम्मी अच्छी शिक्षा के लिए ही उसे लेकर शहर में आई हैं। पिता बाहर कमाते हैं।

97.9 प्रतिशत अभ्यर्थी रहे थे उपस्थित
नीट की परीक्षा तीन मई को शहर के 43 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। उसमें कुल 21,291 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। उनमें से 20,808 उपस्थित व 483 अनुपस्थित रहे थे। इस तरह परीक्षा में कुल 97.7 प्रतिशत ने उपस्थित दर्ज कराई थी। अब सभी अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी कर परीक्षा में शामिल होना होगा।

बेहतर प्रदर्शन के अवसर के रूप में लें
कॅरिअर काउंसलर पुर्णेन्दु शुक्ल ने बताया कि परीक्षा रद्द होने के बाद छात्र और अभिभावक मुझसे संपर्क कर रहे हैं। मैं सभी छात्रों से यही कह रहा हूं कि इस परिस्थिति को निराशा या असफलता के रूप में बिल्कुल न देखें। आपकी तैयारी और मेहनत आज भी उतनी ही मजबूत है। यदि दोबारा अवसर मिलता है, तो उसे बेहतर प्रदर्शन के अवसर के रूप में लें।

अभिभावकों से भी आग्रह है कि वे इस समय बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। बार-बार परीक्षा और परिणाम की चर्चा करने के बजाय बच्चों को भावनात्मक सहयोग दें। शांत वातावरण, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक संवाद ही इस समय विद्यार्थियों को अवसाद और मानसिक दबाव से दूर रखने में सबसे अधिक सहायक होंगे।

बोले परीक्षार्थी व अभिभावक
आज परीक्षा रद्द होने की खबर सुनकर शुरुआत में काफी निराशा हुई। लंबे समय से इसी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। पेपर भी अच्छा हुआ था। उम्मीद थी कि परिणाम बेहतर आएगा। अब नए सिरे से तैयारी करनी होगी। अब कोशिश है कि लय बनी रहे: दक्षिता, अभ्यर्थी

नीट निरस्त होने से मन बहुत परेशान है। ऐसा लग रहा है कि सारी मेहनत बेकार हो गई। घर के लोगों ने मेरा हौसला बढ़ाया कि अब घबराने की नहीं बल्कि शांत मन से दोबारा तैयारी करने की जरूरत है, ताकि दोबारा होने वाली परीक्षा में और बेहतर कर सकूं: हिमानी , अभ्यर्थी
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बच्चे आज काफी तनाव में दिखाई दिए। हमने भी शुरुआत में बहुत चिंता महसूस की। इसके बाद मैंने कॅरिअर काउंसलर और शिक्षकों से बात की। उन्होंने समझाया कि अतिरिक्त दबाव लेने क जगह बच्चों को संभालने और बेहतर के लिए प्रेरित करने की जरूरत है: राहुल तिवारी, अभिभावक

तीन मई को मेरी बेटी परीक्षा देकर लौटी तो काफी संतुष्ट दिखाई दे रही थी। उसने कहा था कि इस बार पेपर उसकी तैयारी के अनुसार गया है। परीक्षा रद्द होने की खबर सुनकर निराशा हुई। पारदर्शिता व विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे हैं तो निष्पक्ष परीक्षा भी जरूरी है: छाया सिंह, अभिभावक
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