प्रो. एसके सोनी ने बताया कि ऑटोनोमस ड्रोन 40 किलो भार लेकर 400 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकेगा। एक बार में दो घंटे तक यह उड़ेगा। यह पहाड़ी इलाकों में सेना के लिए बहुत ही कारगर होगा। लड़ाई के दौरान सैनिकों तक दवाएं एवं अन्य सामान लेकर फौरन पहुंच जाएगा। इसके इस्तेमाल में समय कम जाया होगा।
पेड़-पोल से टकराएगा नहीं
ड्रोन की खासियत यह होगी कि सेंसर लगे होने की वजह से यह पहाड़ों पर पेड़ व पोल से टकराएगा नहीं। जीपीएस से कनेक्ट यह ड्रोन खुद सुरक्षित रास्ता खोज लेगा। जिस सैन्य कैंप में इसे भेजा जाएगा, 95 फीसदी लोकेशन इमेज मिलने पर नीचे उतरेगा और सामान को उपलब्ध करा देगा। यही नहीं, अगर किसी बहुमंजिली इमारत में आग लग गई है तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी में लगे हाइड्रेंट को लेकर उड़ेगा और निश्चित लोकेशन को खोजकर पानी की फुहारें छोड़ने में मदद करेगा।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय ने ऑटोनोमस ड्रोन तैयार किया है। गुजरात में इसका सफल प्रेजेंटेशन भी हो चुका है। अब भारत सरकार के निर्देश पर पांच करोड़ रुपये का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जनसहभागिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। यह ड्रोन खेती-किसानी से लेकर सैनिकों तक के काम आएगा।