विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोषी छात्रों को पहले ही 25 जनवरी तक सही दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दे रखा है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें केवल छह दिन का और मौका मिला है। छात्रों की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल अपील में दलील दी गई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने दस्तावेज प्रस्तुत करने का उन्हें अवसर ही नहीं दिया। उधर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रवेश निरस्त करने के निर्णय से पहले छात्रों को अपनी सफाई देने का कई बार मौका दिया गया। निर्णय के बाद भी विश्वविद्यालय ने उन्हें एक और अवसर दिया था।
छात्रों के खिलाफ फिलहाल तहरीर की कार्रवाई टली
एमएमएमयूटी प्रशासन दोषी छात्रों के खिलाफ थाने में तहरीर देने की तैयारी कर रहा था। इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन विधिक राय भी ले चुका है। मगर, अब हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में फिलहाल थाने में तहरीर नहीं दी जाएगी। वहीं जांच के दौरान फर्जीवाड़ा कर प्रवेश लेने वाले पांच छात्रों का नाम लेजर रजिस्टर पर चढ़ाने का आदेश भी विश्वविद्यालय प्रशासन को मिला है।
इन्होंने स्टेट बैंक में फीस जमा करने का फर्जी रिकार्ड लगाया है। यह आदेश तत्कालीन अधिष्ठाता स्नातक अध्ययन का जारी किया हुआ है जो चार सितंबर 2019 को जारी किया गया है। आदेश वित्त नियंत्रक को दिया गया है। उसके साथ फीस के फर्जी रिकार्ड को भी संलग्नक के तौर पर लगाया गया है।
कुलपति और कुलसचिव को धमकियां देने वाले चिह्नित
फर्जी प्रवेश के मामले में कुलपति प्रो जेपी पांडेय और कुलसचिव डॉ जयप्रकाश को धमकियां मिल चुकी है। कुलसचिव को धमकी उनके ही विभाग में कार्यरत एक लिपिक ने दी है, कुलसचिव ने तहरीर में इसका जिक्र कर रखा है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। वहीं, कुलपति को धमकी देने वाला भी चिह्नित हो गया है। ई-मेल से धमकी देने वाला विश्वविद्यालय का ही कर्मचारी है। फर्जी प्रवेश लेने वाले छात्रों के खिलाफ तहरीर के साथ ही कुलपति को धमकी देने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।