बेलीपार थाने के हिस्ट्रीशीटर शशि मौली शुक्ला को कोर्ट से हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है। वर्तमान में वह हाईकोर्ट से जमानत पर जेल से रिहा है। पुलिस उसके आपराधिक इतिहास को जानने के बाद पुराने विवाद से जुड़े लोगों के भूमिका की भी जांच कर रही।
इतनों से दुश्मनी की पुलिस भी उलझ गई
पुलिस गोली लगने के बाद से जांच में जुटी है, लेकिन शशि मौली की इतने लोगों से दुश्मनी से है कि पुलिस भी उलझ गई है। इस वजह से पुलिस सीसी टीवी कैमरों की मदद से बदमाशों को पकड़ने की पहली कोशिश में लगी है। पुलिस का मानना है कि बदमाशों के पकड़े जाने के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आ जाएगा।
फैजाबाद और महराजगंज में भी दर्ज है केस
बेलीपार के शशि मौली के खिलाफ 1985 में सहजनवां थाने में पहली हत्या का केस दर्ज किया गया। इसके अलावा फैजाबाद के गोसाहगंज थाने में गैंगस्टर का केस दर्ज है। महराजगंज के पनियरा थाने में हत्या का केस दर्ज है। कैंट, बेलीपार सहित कुल 14 मुकदमे है। तीन मई 1990 को हिस्ट्रीशीट खोली गई थी।