| वर्ष |
तापमान |
तारीख |
| 2011 |
39.2 |
24 अप्रैल |
| 2012 |
40.4 |
25 अप्रैल |
| 2013 |
40.5 |
30 अप्रैल |
| 2014 |
40.9 |
27 अप्रैल |
| 2015 |
39.6 |
22 अप्रैल |
| 2016 |
43.0 |
20 अप्रैल |
| 2017 |
41.8 |
29 अप्रैल |
| 2018 |
39.9 |
21 अप्रैल |
| 2019 |
41.4 |
30 अप्रैल |
| 2020 |
38.1 |
15 अप्रैल |
| 2021 |
40.8 |
27 अप्रैल |
| 2022 |
41.4 |
25 अप्रैल |
गर्मी के साथ बढ़ गई कटौती
गर्मी शुरू होते ही बिजली का संकट भी धीरे-धीरे गहराना शुरू हो गया है। गर्मी से लोकल फाल्ट शुरू हो गए हैं। अभियंताओं ने बताया कि सर्दी-गर्मी के मौसम के दौरान बिजली की डिमांड में उतार-चढ़ाव आने लगता है। जैसे, मार्च में 170 एंपियर बिजली खपत होती है तो अप्रैल में 230 एंपियर खपत होने लगी है। गर्मी में उपभोक्ता अपने स्वीकृत कनेक्शन के भार की तुलना में अधिक खपत करते हैं।
दो मंजिला भवन में दो किलोवाट का कनेक्शन लेकर परिसर में एक साथ दो एसी एक साथ चला देते हैं। यही हाल सरकारी दफ्तरों का भी हो जाता है। ऐसे में खपत अचानक बढ़ जाती। दोपहर के समय जब एक साथ ट्रांसफार्मर पर बिजली का भार बढ़ता है तो ट्रांसफार्मर फुंकने लगता।
मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि ट्रांसमिशन से बिजली घर (वितरण) में लगे पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता के अनुसार बिजली आपूर्ति आती है। उपभोक्ता अगर स्वीकृत भार के हिसाब से बिजली आपूर्ति की खपत करें तो परेशानी नहीं होगी।