मेयर सीताराम जायसवाल का पालतू कुत्ता।
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गोरखपुर शहर में मात्र नौ पालतू कुत्ते हैं! क्या आप इस बात पर यकीन कर सकते हैं। कम से कम नगर निगम के आंकड़े तो यही बयां कर रहे हैं। लेकिन इन नौ कुत्तों में मेयर सीताराम जायसवाल के तीन कुत्ते शामिल नहीं हैं क्योंकि मेयर ने अब तक इनके लिए लाइसेंस नहीं लिया है। जबकि नगर निगम की नियमावली के अनुसार शहर में किसी भी व्यक्ति के द्वारा पाले जाने वाले कुत्ते के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना जरूरी है।
शहर में करीब डेढ़ लाख लोग नगर निगम को हाउस टैक्स अदा करते हैं। इनमें से हजारों की संख्या में घरों में महंगे-महंगे कुत्ते शानो-शौकत के प्रतीक हैं। शहर के किसी भी इलाके में सुबह के वक्त सैर पर निकल जाइए, ये ‘स्टेटस सिंबल’ हर जगह नजर आ जाते हैं। लेकिन निगम के आंकड़ों में इनकी संख्या दर्ज नहीं है। निगम की ओर से कई मदों में टैक्स लिया जाता है। इनमें से एक टैक्स पालतू कुत्तों के लिए भी लिया जाता है। लेकिन शहर के अधिकांश लोग न तो नगर निगम से इस पालतू कुत्तों का लाइसेंस लिए हैं और न ही शुल्क जमा करते हैं।
दशकों पुराना तय है कुत्तों का लाइसेंस शुल्क
आज भले ही हम ऑनलाइन तौर पर एक रुपये से कम पैसे का भुगतान कर दें, लेकिन संभवत: नगर निगम को इस तकनीक के इस्तेमाल का वर्षों पहले आभास हो चुका था। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि निगम द्वारा कुत्तों का लाइसेंस टैक्स शुल्क ऐसा है कि निगम को निर्धारित शुल्क से ज्यादा पैसा लेना मजबूरी है। नियमानुसार यह शुल्क मात्र 1.20 रुपये है लेकिन 20 पैसे, 25 पैसे और 50 पैसे का प्रचलन काफी समय खत्म होने की वजह से निगम अब दो रुपये लेता है। इसके बावजूद कुत्ता पालने वाले इसके लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं।