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कानपुर की तरह यहां भी पुलिस टीम पर हुआ था हमला, आठ महीने तक कोमा में थे इंस्पेक्टर प्रदीप

Sat, 04 Jul 2020 03:14 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : PTI
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में चौबेपुर थाना क्षेत्र के बकेरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने गए आठ पुलिसकर्मी हमले में शहीद हो गए। वहीं कई जवान घायल हो गए हैं। वहीं गोरखपुर जिले में पुलिस पर हमले की सबसे बड़ी वारदात खोराबार इलाके में हुई थी।

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उस समय हिस्ट्रीशीटर नंगा निषाद व उसके बेटों ने दबिश देने गई पुलिस पर अचानक हमला बोल दिया था। हमला इतना जोरदार था कि घायल तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह आठ महीने तक कोमा में रहे। इस घटना में नौ अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

दरअसल, खोराबार के मदरहवा निवासी नंगा निषाद, उसका बेटा दयाशंकर व दीपचंद थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। एक आरोप में नंगा के बेटे दयाशंकर पर केस दर्ज होने पर उसे पुलिस विभाग में सिपाही के पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
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बंधक बनाकर की थी पिटाई

12 मार्च 2010 की रात को खोराबार के तत्कालीन इंसपेक्टर प्रदीप सिंह हमराहियों के साथ उसके घर दबिश देने गए थे। इस दौरान नंगा व उसके बेटों ने पुलिसवालों को बंधक बना लिया और जमकर पिटाई की। हालत यह हुई की इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह आठ महीने तक कोमा और अस्पताल से घर आने के बाद करीब एक वर्ष तक बिस्तर पर ही रहे।

इसके बाद नंगा व उसके बेटों पर केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी के बाद कुर्की भी हुई। फिलहाल अभी भी दोनों बाप-बेटा आजाद घूम रहे हैं।
 
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