गणेश चौराहा स्थित शेरे पंजाब रेस्त्रां में भी जहां सोमवार को पैर रखने की जगह नहीं थी, वहीं मंगलवार को ज्यादातर कुर्सियां और मेज खाली दिखीं। टीपी नगर-महेवा बांध स्थित मीट विक्रेता मुख्तार का कहना है कि सोमवार को चार-पांच बकरे की बिक्री हो गई थी। मगर, आज बिक्री कमजोर रही। सिर्फ एक बकरे की ही खपत हो पाई। इसके बाद दुकान बंद कर दी गई।
घोषकंपनी चौराहे पर मीट की जिन दो दुकानों पर आम दिनों में प्राय: भीड़ लगी रहती है, वहां भी मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। गिनती के एक-दो खरीदार ही दुकान पर खड़े मिले। ऐसा ही नजारा दाउदपुर स्थित मीट विक्रेता की दुकान का भी रहा। दुकानदार गद्दी पर बैठे ग्राहक का इंतजार कर रहा था।
एक दिन में बिक गया 45 क्विंटल से अधिक मीट
नवरात्र के एक दिन पहले मंगलवार पड़ने की वजह से सोमवार को ही ज्यादातर मांसाहार के शौकीनों ने छककर मीट-मुर्गा खाया। कई जगहों पर पार्टी का भी आयोजन हुआ। मीट विक्रेताओं के मुताबिक सोमवार को जहां 70 क्विंटल से अधिक मुर्गे और 45 क्विंटल से अधिक बकरे के मीट की खपत हो गई।
पंडित शरत चंद्र मिश्र ने बताया कि पूजा तीन प्रकार की होती है। सात्विक, राजसीय और तामसी। सात्विक पूजा को सर्वोत्तम माना जाता है। अगर किसी को पूजन का श्रेष्ठ फल प्राप्त करना हो तो सात्विक पूजा करें। इसके लिए सात्विक आहार की आवश्यकता है। लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडा सात्विक भोजन की श्रेणी में नहीं आते हैं। ऐसे में पूजन के फल श्रेष्ठ प्राप्ति के लिए नहीं आते हैं। ऐसे में लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडा का सेवन नहीं करना चाहिए।