दिखावे को लगाए गए 4जी के जमाने में टू-जी जैमर का भी कैदियों ने तोड़ खोजा। जब भी ठीक से मारा गया छापा, जेल से बरामद किए गए मोबाइल फोन। त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे से होकर जेल में जाता है सामान, मोबाइल बरामद फिर भी जेल प्रशासन पर कार्रवाई नहीं।
गोरखपुर जिला जेल में बंद होने के बावजूद कई बदमाश मोबाइल फोन की मदद से आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये अपराधी बाहरी दुनिया में संपर्क साधने में वाईफाई कॉलिंग-व्हाट्सएप कॉलिंग जैसी तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें मोबाइल फोन में किसी सिम तक की जरूरत नहीं है।
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मंगलवार को जेल में छापे के दौरान पुलिस को मोबाइल फोन तो मिले, मगर उनमें सिम नहीं थे, यह इस बात की तस्दीक भी करते हैं कि जेल में बंद अपराधियों द्वारा इस्तेमाल आधुनिक एप्लीकेशंस के आगे जेल में दिखावे को लगे टू जी जमाने के जैमर बौने साबित हो रहे हैं। यही नहीं, रंगदारी की कॉल की शिकायत आने के बाद इन कॉल्स को ट्रैक करने में भी पुलिस को पसीना आ रहा है।
मंगलवार को मिठाई कारोबारी से रंगदारी मांगने के मामले में डीएम, एसएसपी की अगुवाई में टीम जेल में पहुंची थी। अलग-अलग टीम ने जांच की तो वहां से एक मोबाइल, चाकू और कई आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया। जानकारी के मुताबिक, जेल में बंद अपराधी बड़े आराम से मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बदमाश बिना सिमकार्ड के मोबाइल फोन में ट्रू कॉलर, व्हाट्सएप जैसे एप इंस्टाल कर कॉलिंग कर रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य एप्लीकेशन भी इनके मददगार हैं।
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साइबर एक्सपर्ट नितिन आहूजा बताते हैं कि वैसे भी यह सब अब राकेट साइंस तो हैं नहीं, यू ट्यूब पर ऐसे एप को इंस्टाल करने और चलाने की सभी तकनीक की जानकारी उपलब्ध है। फोर जी के जमाने में जेल में लगे टू जी कॉल के जैमर से उन्हें कोई दिक्कत नहीं। उनकी बातचीत को सर्विलांस कर आसानी से ट्रेस करना भी इतना आसान नहीं है। इंटरनेट की उपलब्धता ने उनकी पहुंच जेल की दीवारों के पार बेहद सहज कर दी है।
सुरक्षा घेरा भी हुआ बेमानी
जेल में कोई भी व्यक्ति या वस्तु अंदर दाखिल होने से पहले त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे से गुजरती है। बावजूद इसके मोबाइल जेल के अंदर पहुंच जाता है। इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यकीनन जेल प्रशासन। मंगलवार तक सब कुछ ठीक होने की दलील देने वाले यही अफसर छापे के बाद अब बात करने से ही कतरा रहे हैं।
आसान नहीं इंटरनेट कॉल पकड़ना
जेल में बंद बदमाश सामान्य फोन कॉल पर बात करने से अधिक इंटरनेट कॉल पर बात करना कहीं अधिक महफूज समझ रहे हैं। इसके लिए वह विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के इंटरनेट राउटर या फिर इंटरनेट चलाने वाले किसी अन्य कैदी से हॉटस्पाट से कनेक्ट होकर इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तो सभी जानते हैं कि अगर आपके फोन को कहीं से इंटरनेट की सुविधा मिल जाए तो आप व्हाट्सएप से लेकर तमाम एप के जरिए बातचीत कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अपराधी यह भी अच्छी तरह जान गए हैं कि इंटरनेट कॉल या फिर अन्य सोशल मीडिया पर हुई बातचीत को ट्रेस करना जिला पुलिस के लिए इतना आसान नहीं है, जितना सिम से की गई कॉल को पकड़ना है।
इंटरनेट कॉल से आ चुकी है रंगदारी की बात
18 जुलाई को सिकरीगंज थाने के रामडीह निवासी व्यापारी अयोध्या प्रसाद जायसवाल को फोन करके बदमाशों द्वारा 20 लाख रुपये की रंगदारी के मामले में भी इंटरनेट कॉल की बात सामने आई थी। जिसे पुलिस आज तक ट्रेस भी नहीं कर सकी। इसके अलावा भी कई अन्य मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें इंटरनेट कॉलिंग की वजह से उसे ट्रेस करना जिला पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ।
जेल में लगे है दो जैमर
जेलों से लगातार रंगदारी की कॉल जाने की शिकायत के बाद 29 मार्च 2017 को गोरखपुर और प्रतापगढ़ की जेल में जैमर लगाने के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट सरकार ने दिया। इसके बाद जेल में पहले बैरक नंबर 13 और 11 के दायरे में जैमर लगाया गया और फिर जेल अफसरों ने दावा किया कि जैमर लगने से जेल के बैरक नंबर 9,10,11,12,13,14 में मोबाइल काम नहीं करेगा।
बेकार हो गया जैमर
गोरखपुर जेल 62 एकड़ में फैली है। 15 एकड़ में बंदियों का बैरक और 47 एकड़ में अधिकारियों का आवास व ऑफिस है। इसे कवर करने के लिए आठ जैमर की डिमांड की गई थी। बताया जाता है कि जब जैमर आया था तब टूजी नेटवर्क चल रहा था, लेकिन जैमर लगाने में इतनी देर कर दी गई कि तब तक थ्री और फिर फोर- जी नेटवर्क चलने लगे। जिससे जैमर बेकार हो गया।
पहले भी मिले हैं मोबाइल
17 अगस्त 2021- डीएम और एसएसपी के छापे के दौरान जेल में बिना सिमकार्ड का एक मोबाइल फोन और एक बैट्री बरामद हुई।
12 नवंबर 2016- जेल में छापे के दौरान 120 मोबाइल फोन बरामद हुए।
13 मई 2016- जेल में डीएम और एसएसपी का छापा, चाकू, मोबाइल चार्जर, कलर टीवी, सेटअप बाक्स बरामद।
14 मई 2016- जेल की तलाशी में चाकू, लाइटर, फोन चार्जर, कैंची बरामद हुई।
24 फरवरी 2016- जिला कारागार में छापे के दौरान छह मोबाइल सेट, सिमकार्ड, चाकू सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद।
08 जून 2015- जेल में छापे के दौरान मोबाइल फोन बरामद हुआ।
31 जनवरी 2021- गुलरिहा इलाके में ग्रामप्रधान से जेल से फोन कर 20 हजार रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।
16 नंबवर 2019- जेल में बंद गोरखपुर के कुख्यात बदमाश चंदन सिंह के नाम पर सहजनवां टिकरी के पूर्व प्रधान वीरेंद्र मिश्र से एक बदमाश ने दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी।
2 जुलाई 2017- झंगहा इलाके के प्रधान को फोन किया गया।
29 जून 2017- बेलीपार इलाके के बिजनेसमैन को फोन किया गया।
28 जून 2017- इलाके के प्रसिद्ध डॉक्टर से रंगदारी मांगी गई।
6 दिसंबर 2016- मेयर डॉक्टर सत्या पांडेय को जानमाल की धमकी दी गई।
10 नवंबर 2016- पीपीगंज इलाके के ज्वेलरी कारोबारी को जेल से फोन किया गया।
18 मई 2016- बड़हलगंज इलाके के एक डॉक्टर को फोन किया गया।
वर्ष 2013 जेल में बंद टीका सिंह के भाई सन्नी सिंह और युवराज सिंह ने गगहा के रितेश मौर्य से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। नहीं देने पर बदमाश ने रितेश मौर्य सहित उनके सहयोगी शंभू और एक अन्य व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इसका खुलासा पुलिस ने किया है।