मनीष गुप्ता हत्याकांड का आरोपी दरोगा विजय यादव।
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कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में दर्ज हत्या के केस के छठवें आरोपी निलंबित दरोगा विजय यादव ने भी अन्य आरोपियों की तरह एसआईटी की पूछताछ में खुद को बेगुनाह बताया। बताया कि घटना के समय वह कमरे में मौजूद ही नहीं था। दरोगा ने कहा कि वह तो घायल होने की सूचना पर राहुल दुबे के साथ होटल आया था। इंस्पेक्टर ने घायल मनीष को अस्पताल ले जाने के लिए बुलवाया था। हमलोग अस्पताल ले गए थे।
पूछताछ में विजय यादव ने बताया कि इस मामले में पहले पकड़े गए इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा, दरोगा राहुल दुबे और कांस्टेबल प्रशांत भी खुद को बेगुनाह बता चुके हैं। इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा ने घटना को हादसा बताया था। उनका कहना था कि मनीष गुप्ता ने ज्यादा पी रखी थी। नशे की हालत में ही उसे चोट आई और अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
सूत्रों से पता चला है कि दरोगा विजय यादव ने इंस्पेक्टर जेएन सिंह द्वारा लिखी गई जीडी (जनरल डायरी) में दर्ज बातों के इर्द-गिर्द ही सवालों का जवाब दिया है। दरोगा विजय यादव ने एसआईटी को जो कुछ बताया, उसके बारे में जो जानकारी बाहर आई है, उसके मुताबिक उसने कहा कि इंस्पेक्टर के हमराही के फोन करने पर मैं गया था। उस समय मैं राहुल दुबे के साथ क्षेत्र में था। होटल पहुंचे तो एक युवक घायल हाल में मिला उसके नाक के पास से खून निकल रहा था। उस वक्त तक हमें यह भी नहीं पता था कि यह युवक कौन है और कहां से आया है। उसे अस्पताल लेकर गए। वहां से बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए। उसकी मौत हो गई थी, लिहाजा मैं डर गया और केस दर्ज होने के बाद जिला छोड़ दिया था।