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मनीष हत्याकांड: सीबीआई ने भी छह पुलिसकर्मियों को माना हत्या का आरोपी, लखनऊ कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट

Sat, 08 Jan 2022 10:19 AM IST
Vikas Kumar अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

सीबीआई पिछले तीन माह से जांच में जुटी थी। 90 दिन पूरा होने के एक दिन पहले ही सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सीबीआई ने मामले में 21 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। जांच में जेएन सिंह एंड कंपनी को सुनियोजित तरीके से घटना वाले दिन होटल में जाने के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर जांच टीम ने आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।
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आरोपी पुलिस वाले - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने लखनऊ की सीबीआई अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई ने रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जयनारायण सिंह (जेएन सिंह) व चौकी प्रभारी दरोगा अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों को हत्या, गंभीर उत्तेजना के साथ आपराधिक बल का प्रयोग करना, एक समान इरादे से सभी के द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य समेत अन्य गंभीर मामलों में आरोपी बनाया है। इसकी जानकारी गोरखपुर की सीजेएम कोर्ट को भी दी गई है। हालांकि, चार्जशीट की कोई भी प्रति सीजेएम कोर्ट में दाखिल नहीं की गई है। 

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सीबीआई पिछले तीन माह से जांच में जुटी थी। 90 दिन पूरा होने के एक दिन पहले ही सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सीबीआई ने मामले में 21 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। जांच में जेएन सिंह एंड कंपनी को सुनियोजित तरीके से घटना वाले दिन होटल में जाने के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर जांच टीम ने आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। टीम ने पाया कि जेएन सिंह के अलावा अन्य लोग भी इस घटना में बराबर से सहयोगी हैं। इसी आधार पर सभी आरोपियों को हत्या व अन्य गंभीर धाराओं में आरोपी बनाया गया है।

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की पुलिसकर्मियों की पिटाई से मौत का यह मामला पूरे देश में गूंजा था। कानपुर पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगने पर, राज्य सरकार ने मामले की जांच कानपुर पुलिस से कराई थी। कानपुर की पुलिस ने एसआईटी गठित कर जांच शुरू की थी। पीड़ित पक्ष की मांग पर बाद में सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी। 
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एसआईटी ने भी अपनी जांच में पाया था आरोपी
मनीष हत्याकांड की जांच, पहले गोरखपुर पुलिस, फिर कानपुर की एसआईटी ने डेढ़ माह की। एसआईटी ने गोरखपुर में 21 गवाह तैयार किए थे। इसमें निजी अस्पताल के चिकित्सक, बीएमएस चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज की टीम, थाने पर तैनात तत्कालीन पुलिसकर्मी, रात्रि प्रभारी थाना इंचार्ज, होटल कर्मी, होटल मालिक, मनीष के दोस्त समेत अन्य लोग थे। एसआइटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में जेएन सिंह एंड कंपनी को आरोपी बताया था।

अभी तक की जांच में होटल कर्मी को दी क्लीन चिट
सीबीआई ने दाखिल चार्जशीट में सिर्फ पुलिसकर्मियों को ही आरोपी बनाया है। मामले में होटलकर्मियों या प्रबंधन की कोई गलती नहीं मिली है। हालांकि, घटना के बाद से ही होटल मालिक सुभाष शुक्ला भी मामले में खुलकर बोलते दिखे। उन्होंने बताया था कि थाने की तरफ से वसूली के लिए अलग-अलग तरीके से जेएन सिंह एंड कंपनी दबाव बनाती थी। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई को अपनी जांच में यह मिला था कि तत्कालीन रामगढ़ताल थाने की पुलिस होटल प्रबंधन पर गलत दबाव बनाती थी। घटना के वक्त कमरे में पुलिस वालों के साथ गए, होटलकर्मी आदर्श को सीबीआई ने गवाह बनाया है।

इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
मनीष हत्याकांड में रामगढ़ताल थाना के तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह (जेएन सिंह), चौकी प्रभारी दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा विजय यादव, दरोगा राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश सिंह यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।

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यह हो सकती है सजा

302 : हत्या (सजा-मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और साथ ही जुर्माना)
325 : स्वेच्छापूर्वक किसी को गंभीर चोट पहुंचाना (सजा- सात वर्ष कारावास, आर्थिक दंड)
323 : जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुंचाना ( सजा- 1 वर्ष कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों)
506 : धमकी देना सजा- अपराध साबित होने पर दो-दो साल की सजा और अर्थदंड।
218 : लोक सेवक द्वारा गलत रिकॉर्ड तैयार करने या सजा से व्यक्ति को बचाने के इरादे से लेखन, या जब्ती से संपत्ति। सजा- 3 साल या जुर्माना या दोनों
201 : अपराध के साक्ष्य का विलोपन या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए झूठी जानकारी देना। सजा- सात वर्ष कारावास और आर्थिक दंड।
34 : जब एक आपराधिक कृत्य सभी व्यक्तियों ने सामान्य इरादे से किया हो, तो प्रत्येक व्यक्ति ऐसे कार्य के लिए जिम्मेदार होता है, जैसे कि अपराध उसके अकेले के द्वारा ही किया गया हो।
120 बी :  आपराधिक साजिश (जिसकी अवधि छह मास से अधिक की नहीं होगी या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा)
149 : यदि किसी गैरकानूनी सभा के किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है, तो ऐसी सभा का हर दूसरा सदस्य अपराध का दोषी होगा।
 

प्रकरण में कब क्या हुआ

0 27 सितंबर 2021 की रात में रामगढ़ताल पुलिस होटल कृष्णा पैलेस में गई थी और मनीष की मौत हुई
0 28 सितंबर को मौत के बाद पत्नी मीनाक्षी ने मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में हंगामा किया
0 28 सितंबर शाम में पुलिस ने मीनाक्षी के दबाव में आरोपित पुलिस वालों को निलंबित कर केस दर्ज किया
0 28 सितंबर की रात में मीनाक्षी को मैनेज करने का डीएम और एसएसपी का वीडियो वायरल हो गया
0 29 सितंबर की दोपहर कानपुर में मीनाक्षी ने गोरखपुर पुलिस पर विश्वास न होने का आरोप लगाया
0 1 अक्तूबर की आधी रात एसआईटी कानपुर को सौंपी गई जांच
02 अक्तूबर दोपहर कानपुर एसआईटी जांच के लिए गोरखपुर आ गई
10 अक्तूबर को रामगढ़ताल इलाके से इंस्पेक्टर जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा को गिरफ्तार किया
12 अक्तूबर को पुलिस ने दरोगा राहुल दुबे और सिपाही प्रशांत कुमार को गिरफ्तार किया
13 अक्तूबर को पुलिस ने मुख्य आरक्षी कमलेश यादव को गिरफ्तार किया
16 अक्तूबर को पुलिस दरोगा विजय यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा
02 नवंबर को सीबीआई को मनीष प्रकरण की विवेचना सौंप दी गई
07 जनवरी 2022 को सीबीआई ने केस में सभी पुलिस वालों के खिलाफ हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी
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