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16 से खरमास की शुरुआत: शादी-विवाह पर लगा विराम...अब अगले महीने बैंड-बाजा-बरात

Thu, 14 Dec 2023 11:52 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सूर्य जब धुन राशि में पहुंचते हैं तो धनु की संक्रांति होती है। इसी दिन से खरमास प्रारंभ हो जाता है और मकर की संक्रांति लगते ही खरमास समाप्त हो जाता है। इस मास में भगवत पूजन का विशेष महत्व है। इस महीने में दही-चावल और दूध से निर्मित पकवान (खीर आदि) के भोग का विशेष महत्व है।
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शादी। (सांकेतिक) - फोटो : istock
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विस्तार
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गोरखपुर में बुधवार को अंतिम मुहूर्त के साथ ही इस साल शादी-विवाह पर विराम लग गया। ऐसा इसलिए कि 16 दिसंबर से खरमास की शुरुआत हो जाएगी। अब अगले साल 15 जनवरी को मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। विवाह के लिए पहला मुहूर्त 16 जनवरी को मिल रहा है।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी 16 दिसंबर की रात्रि एक बजकर 26 मिनट पर सूर्य धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। यह पौष शुक्ल चतुर्थी दिन सोमवार 15 जनवरी की सुबह नौ बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ संक्रांति 15 जनवरी को होगी। पौष मास में ही मांगलिक कार्य की शुरुआत हो जाएगी।

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सूर्य जब धुन राशि में पहुंचते हैं तो धनु की संक्रांति होती है। इसी दिन से खरमास प्रारंभ हो जाता है और मकर की संक्रांति लगते ही खरमास समाप्त हो जाता है। इस मास में भगवत पूजन का विशेष महत्व है। इस महीने में दही-चावल और दूध से निर्मित पकवान (खीर आदि) के भोग का विशेष महत्व है। निष्काम भाव से धर्मशास्त्र के पुस्तक का वाचन, स्तोत्र पाठ आदि धार्मिक क्रियाओं को करने का विधान है।
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इसलिए नहीं होते मांगलिक कार्य
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं। इन 12 राशियों पर सूर्य की स्थिति रहती है। प्रत्येक एक मास तक एक राशि पर रहने के बाद सूर्य दूसरे राशि में प्रवेश करते हैं। इसमें दो संक्रांतियों पर सूर्य, बृहस्पति की राशि पर रहता है। ये धनु और मीन राशियां हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य की स्थिति बृहस्पति की राशि पर होती है तो बृहस्पति का तेज समाप्त हो जाता है।

उन्होंने बताया कि मांगलिक कार्यों के लिए तीन ग्रहों सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के बल की आवश्यकता होती है। इनमें किसी भी ग्रह के बल में न्यूनता होने से मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। खरमास के महीने में बृहस्पति के बलहीन होने से शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसी प्रकार जब महीने में सूर्य, चंद्रमा के ज्यादा करीब आ जाता है तो उस समय भी शुभ मुहूर्त का अभाव रहता है। यह स्थिति प्रत्येक महीने में अमावस्या के आसपास देखी जाती है। इसे मासांत दोष की संज्ञा दी गई है।

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न करें ये कार्य
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, वधू प्रवेश, वर वरण, कन्या वरण, बरच्छा, विवाह से संबंधित समस्त कार्य, मुंडन, यज्ञोपवीत, दीक्षा ग्रहण, गृहप्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, प्रथम बार तीर्थ पर गमन, देव स्थापन, देवालय का आरंभ, मूर्ति स्थापना, किसी विशिष्ट यज्ञ का आरंभ, कामना परक कर्म का आरंभ, व्रतारंभ, व्रत का उद्यापन जैसे कार्य खरमास में नहीं किए जाते हैं।

अगले वर्ष विवाह मुहूर्त
  • जनवरी- 16, 17, 18, 20, 21, 22, 27, 29, 30, 31
  • फरवरी- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14, 17, 18, 19, 23, 24, 25, 27
  • मार्च - 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 11, 12


 
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