राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिले में दो बार आए थे। वह वर्ष 1928 में बाबा राघव दास के साथ बरहजिया ट्रेन से बरहज पहुंचे थे। उन्होंने अनंत पीठ में आयोजित अधिवेशन को संबोधित किया था। वहीं 1929 में गौरीबाजार क्षेत्र के इंदूपुर स्थित मेला स्थल पर आए थे। यहां लोगों को विदेशी सामान का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित किया था।
फरवरी 1922 में चौरीचारा कांड से दुखी होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पूर्वांचल में आकर आंदोलन वापस कर लिया था। वर्ष 1928 में तीन डिब्बों वाली बरहजिया ट्रेन में सवार होकर वह बाबा राघव दास के साथ बरहज पहुंचे, जहां उन्होंने अनंत पीठ में आयोजित अधिवेशन को संबोधित किया।
अधिवेशन में बापू को सुनने के लिए हजारों की भीड़ जमा हुई थी और लोगों ने देश की आजादी में सहयोग करने के लिए उन्हें पूरा भरोसा दिया। बरहजिया ट्रेन जब बरहज स्टेशन पर पहुंची तो सैकड़ों लोग बापू को देखने के लिए दौड़ पड़े। महात्मा गांधी स्टेशन से पैदल अनंत पीठ आश्रम पहुंचे, जहां पीपल के वृक्ष के नीचे अधिवेशन को संबोधित किया। यह वृक्ष आज भी साक्षी है।