डॉ. अमित शाही के अनुसार, सही समय पर इलाज न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। कोई अपने साथ अदृश्य शक्ति होने का दावा करता है तो कोई अजीब हरकतें करने लगता है। आंख बंद करके खुद से बात करना, सिर तेजी से हिलाना, ऐसी चीजे देखने का दावा करना, जो अस्तित्व में हैं ही नहीं, अचानक रोना और फिर हंसने लगना समेत कई अन्य तरह के लक्षणों के लोग इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। लक्षणों के आधार पर बीमारी का निर्धारण कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
इलाज के बाद हो रहे स्वस्थ
डॉ. अमित शाही ने बताया कि शुरू में कई मरीज इलाज पर भरोसा नहीं करते हैं। लेकिन दो से ढाई महीने में जब धीरे-धीरे सुधार होना शुरू होता है। तो झाड़-फूंक के चक्कर से निकलकर इलाज पर भरोसा जताने लगते हैं।
जिला अस्पताल मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही ने कहा कि मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता का अभाव लोगों को अंधविश्वास की तरफ ढकेल रहा है। यही कारण है कि लोग भ्रम का शिकार होते हैं। ऐसे लोगों की लगातार काउंसिलिंग की जा रही है। इसका असर लोगों में दिख रहा है।