- शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन करने पर ससुर को भी मिली तीन महीने की सजा
- रेलवे स्टेशन रोड पर आठ अक्टूबर 2011 को चेकिंग में मिला था असलहा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वर्ष 2011 में सुधीर सिंह का नाम शहर में काफी चर्चित हो चुका था। शहर के हर छोटे-बड़े झगड़ों में उसका नाम आ ही जाता था। रेलवे स्टेशन रोड पर आठ अक्टूबर 2011 को पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक स्कार्पियो रोका था। उस गाड़ी में सुधीर सिंह सवार था। टेरर बनाने के लिए अपने साथ ससुर की बंदूक भी रखा था।
पुलिस के अनुसार स्कार्पियो में चार लोग सवार थे जिसमें सुधीर सिंह अपने भाई उदयवीर सिंह के साथ बैठा था। सुधीर और उदयवीर दोनों के पास असलहा था। उदयवीर के पास से पुलिस ने रायफल बरामद किया था लेकिन उसका लाइसेंस उदयवीर के पास था। वहीं सुधीर के पास से 12 बोर का एक बंदूक बरामद हुआ, जिसका लाइसेंस उसने अपने ससुर नरसिंह के नाम होना बताया था।
सुधीर ने अपने ससुर के नाम का लाइसेंस भी दिखाया लेकिन लाइसेंसी के न होने पर पुलिस ने सुधीर सिंह और उसके ससुर बेलीपार थाना क्षेत्र के जंगल रानी सोहास कुंवारी टोला बड़ेरिया निवासी नरसिंह के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। गवाहों और सबूतों के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसी मामले में 13 साल बाद कोर्ट ने सुधीर और उसके ससुर नरसिंह को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया है। सुधीर को कोर्ट ने जहां दो साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड तो वहीं नरसिंह को शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन करने के जुर्म में दोषी पाते हुए तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।