पूर्व ईडी के बेटों की नियुक्ति का मामला: ऋषिकेश एम्स की टीम जांच कर लौटी, जल्द फिर आएगी
पूर्व ईडी सुरेखा किशोर के दो बेटों की एम्स में हुई थी नियुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एम्स की पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के दोनों बेटों की नियुक्ति के विवादित मामले में जांच करने ऋषिकेश एम्स की टीम पहुंची, लेकिन हाजिरी रजिस्टर नहीं मिलने से लौटना पड़ा। जल्द ही जांच टीम दोबारा आ सकती है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन विभागों में तैनाती हुई थी, वहां के जिम्मेदारों ने इनके रोजाना के हस्ताक्षर पंजिका की जांच कभी की या नहीं। ऐसा इसलिए कि तैनाती के दौरान जिम्मेदारों के आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उनका वेतन बना। ऐसे में विभाग के जिम्मेदार भी कार्रवाई के जद में आ सकते हैं।
दरअसल, एम्स गोरखपुर की पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ एम्स ऋषिकेश में जांच चल रही है। एम्स की पूर्व कार्यकारी निदेशक (ईडी) प्रो. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई तय करने के लिए सबसे पहले विजिलेंस की रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें सभी नियमों के साथ पूर्व ईडी की ओर से की गई नियुक्ति में नियमों को दरकिनार किए जाने का भी जिक्र था। इस रिपोर्ट के बाद पहले एम्स के गवर्निंग बॉडी की बैठक बुलाई गई।
एम्स सूत्रों ने बताया कि मामले में डॉ. सुरेखा किशोर के अलावा तीन से चार लोगों को भी आरोपी माना गया था। पूर्व जांच के दौरान पूर्व ईडी पर पर आरोप लगा था कि नियुक्ति ही नियमों को दरकिनार कर नहीं की गई थी, बल्कि दोनों बेटों को बिना नौकरी किए ही वेतन भी दे दिया गया था। एक शिकायत पर विजिलेंस ने जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को दी थी, जिसके आधार पर जनवरी 2024 में उन्हें हटाकर एम्स पटना के प्रभारी कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल को गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक का चार्ज दिया गया था।
2020 से पूर्व एम्स गोरखपुर का कार्यभार संभालने से पहले वह एम्स ऋषिकेश की डीन थीं। उधर, ऋषिकेश प्रबंधन ने जांच आगे बढ़ाते हुए एम्स गोरखपुर से बेटों की उपस्थिति पंजीकरण पंजिका मांग ली है। माना जा रहा है एक बार फिर से मामले में जांच तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, एम्स ऋषिकेष की टीम की जांच इस बिंदु पर भी है कि पूर्व ईडी के दोनों बेटों को जो वेतन दिया गया है, उनके हिसाब से रजिस्टर पंजिका में हस्ताक्षर है या नहीं। यह भी कि उनका वेतन किस आधार पर बनाया गया।
हस्ताक्षर पंजीकरण लापता होने पर दर्ज हो सकता है प्राथमिकी
एम्स के प्रशासकीय सूत्रों ने बताया कि प्रबंधन की तरफ से उम्मीद है कि मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। इस दौरान नियुक्ति की समयावधि में रजिस्टर की निगरानी और उसके बाद लापता होने समेत कुछ विभागीय विषयों में लापरवाही को लेकर भी प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है।
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एक वर्ष के भीतर दो ईडी पर हुई थी कार्रवाई
दो जनवरी, 2024 को एम्स पटना के ईडी प्रो. गोपाल कृष्ण पाल को एम्स गोरखपुर का कार्यवाहक ईडी बनाया गया था। प्रो. पाल को छह महीने के लिए एम्स गोरखपुर भेजा गया था। दो जुलाई को एक बार फिर तीन महीने का कार्यकाल बढ़ाया गया। दो अक्तूबर को कार्यकाल पूरा होना था, लेकिन छह दिन पहले ही उन्हें हटा दिया गया। आरोप लगा कि डॉ. जीके पाल ने भी अक्तूबर में अपने बेटे डॉ. औरव पाल को पीजी कक्षा में नियुक्ति दिला दी थी।
वर्जनपिछली बार जब पंजीकरण पुस्तिका मांगी गई थी, तभी से इसे खोजा जा रहा है। अभी मिली नहीं हैं। खोजबीन कराई जा रही है। एम्स ऋषिकेष की जांच टीम का पूरा सहयोग किया जा रहा है।
- डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, गोरखपुर एम्स