- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक छात्र 27, दो छात्र 16 और 15 साल से कर रहे एमबीबीएस की पढ़ाई
- संबंधित छात्रों ने पिछली मार्कशीट नहीं दी तब रुका परिणाम, इसके बाद सामने आई सच्चाई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 15 से 27 वर्षों में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी न करने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से दिशा-निर्देश मांगा है। पहले भी दो बार पत्र लिखने के बाद भी जवाब नहीं मिला है। तीनों छात्र एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल हुए हैं लेकिन इनका रिजल्ट रोक दिया गया है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज सत्र 2021-22 के पहले दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध था। तीनों छात्रों का प्रकरण भी पहले का है।एक छात्र वर्ष 1998 से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। दूसरा 2009 से तो तीसरा 2010 से। पांच वर्ष की यह पढ़ाई ये छात्र 15 से 27 वर्षों में भी पूरी नहीं कर सके। अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने इन तीनों छात्रों का परीक्षा परिणाम रोक दिया है।
बताया जा रहा है कि यह मामला बीते जून-जुलाई के महीने गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की पकड़ में आया था। तब संबंधित तीनों ही छात्रों का परिणाम जारी करने के लिए उनकी पिछली मार्कशीट की प्रति मेडिकल कॉलेज के जरिये मांगी गई। छात्रों की ओर से वह उपलब्ध नहीं कराई गई। उसके बाद उनसे संबंधित कागजात जुटाए गए। उसमें पता चला कि एनएमसी ने 2020 में अपनी स्थापना के बाद यह तय किया कि जो भी छात्र 10 वर्ष में भी एमबीबीएस की डिग्री पूरी न कर सके, उसकी डिग्री निरस्त कर दी जाए। इसे देखते हुए ही उन छात्रों के परीक्षा परिणाम रोक दिए गए। जुलाई महीने में एनएमसी को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगा गया। जवाब नहीं मिलने पर सितंबर और फिर दिसंबर में एनएमसी को रिमाइंडर भेजा गया। इस संबंध में अब तक दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
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वर्ष 2021 से अटल बिहारी विवि से हुई संबद्धता
बीआरडी मेडिकल कॉलेज सत्र 2021-22 से अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ से संबद्ध हो गया। तब से जो भी नए छात्र आए, उनकी डिग्री वर्ष 2026 से अटल बिहारी विवि ही देगा। वर्ष 2020 और उससे पहले के छात्रों की डिग्री डीडीयू देता है। वर्ष 2025 डीडीयू से पास होने वाला मेडिकल कॉलेज का अंतिम बैच था।
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कोट
इस मामले में एनएमसी को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। एनएमसी की ओर से दिशा-निर्देश मिलने के बाद उसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
- डॉ. कुलदीप सिंह, परीक्षा नियंत्रक, डीडीयू