अक्सर अक्तूबर व नवंबर में मादा टिड्डा, ऊंचे स्थानों पर अंडा देती है, अनुकूल मौसम होने पर जून-जुलाई में इन अंडो से छोटे-छोटे फुदकने वाले टिड्डे निकलते हैं। ये गन्ने के हरे पत्तों को बीच से खा जाते हैं, जिससे गन्ने में भोजन बनाने की प्रक्रिया रूक जाती है और फसल का विकास रुक जाता है। उन्होंने किसानों को इन टिड्डियों से गन्ने की फसल बचाने का उपाय बताने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी दिया।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि टिड्डा किटों से फसल बचाने के लिए किसानों को फसल की सिंचाई करनी चाहिए। खाली खेत की जुताई करें।
कीटनाशक क्लोरपायरीफास एक लीटर को 500 लीटर पानी में घोलकर फसलों पर छिड़काव करें या नीम का आधा लीटर तेल 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। कोशिश करें सभी किसान अपनी-अपनी फसलों में एक साथ छिड़काव करें।