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मिड डे मील के खाने में मिले थे कीड़े: बच्चों की जान पर बनी, अफसर बता रहे मूलांकुर

Tue, 18 Jul 2023 02:31 PM IST
vivek shukla अरुण मुन्ना, गोरखपुर।

सार

मिड-डे-मील के राजमा में कीड़े मिलने की बात अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। लोगों के बीच अब बहस का मुद्दा भी बन गया है। एक शिक्षक नेता ने सवाल उठाया है कि सबने देखा की कीड़ा है पर प्रशासन को सबूत चाहिए।
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गांव में लोगों में दहशत साफ नजर आया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में गुलरिहा इलाके के सरैया बाजार स्थित कंपोजिट विद्यालय में शनिवार की दोपहर मिड-डे मील में मिले कीड़े को भले ही राजमा का मूलांकुर बताकर जिम्मेदार अपनी गर्दन बचा लें, लेकिन बीमार हुए बच्चे अब भी यही कह रहे हैं कि उन्होंने कीड़े देखे थे।

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बच्चों के बीमार होने के बाद उनकी परवाह से ज्यादा राजमा फेंककर साक्ष्य मिटाने की कोशिश से अभिभावक बड़े ही गुस्से में हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बहुत सारे लोगों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। उनका कहना है कि अगर बच्चे को कुछ हो जाता तो उनकी दुनिया ही उजड़ जाती। अफसरों का क्या है, अपनी गर्दन बचाने के लिए कुछ भी बोल रहे हैं।

सोमवार को स्कूल में सिर्फ 58 बच्चे ही आए थे। उधर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती 14 बच्चों को दोपहर बाद छुट्टी मिल गई। डॉक्टरों ने उनकी सेहत दुरुस्त बताते हुए परिजनों के साथ घर भेज दिया। अमर उजाला की टीम ने अस्पताल के बाद घर लौटे बच्चों के घर जाकर उनकी सेहत और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। सभी बच्चे और उनके अभिभावक अभी भी दहशत में हैं।
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स्कूल में पढ़ते छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।
दोपहर करीब 1.50 बजे कमलेश के घर के पास नीम के पेड़ के नीचे मीरा और लक्ष्मीना मिलीं। उनके अगल-बगल गांव की चार पांच अन्य महिलाएं भी खड़ी होकर बच्चों का हालचाल पूछ रही थीं। मीरा का बेटा निखिल भी स्कूल का मिड डे मील खाकर बीमार हो गया था। अपने बेटे की सेहत को लेकर मीरा काफी चिंतित नजर आईं। बच्चे की हालत कैसी है? यह पूछते ही वह गुस्से से तमतमा गईं। बोलीं, बच्चे को अगर कुछ हो जाता तो उनकी दुनिया ही लुट जाती। बेटा बता रहा है कि उसने कीड़ा देखा है और साहब लोग कह रहे हैं कि कोई कीड़ा नहीं था।

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वहीं खड़ीं लक्ष्मीना, मीरा को रोकते हुए बोलने लगीं। कहा-मेरे बच्चे अजीत और राधिका भी खाना खाने के बाद बीमार हो गए थे। अभी तक कोई भी अधिकारी हालचाल लेने नहीं आया, पहले आप ही लोग हैं जो आए हैं। अगर शाम को विधायक नहीं पहुंचते तो सही से इलाज भी नहीं हो पाता। भीड़ देखकर अपने घर से टहलते हुए कमलेश भी आ गए। उनकी बेटी खुशी कक्षा में एक पढ़ती है।

कमलेश कुछ देर तक सुनते रहे फिर खुद को रोक नहीं पाए। बोले, अब आप ही बताइए अगर खाना ठीक था और कीड़े नहीं थे तो बच्चों की हालत क्यों बिगड़ी ? उन्हें अस्पताल क्यों ले गए और इलाज कराने की जरूरत क्यों पड़ी? वहां मौजूद इसरावती ने कहा कि बेटी पलक भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रही। साहब, यह जान लीजिए कि सब लोग गोलमाल कर रहे हैं। मुझे तो अब स्कूल भेजने में डर लग रहा है। संवाद

स्कूल में पकता भोजन तो कई नप गए होते

स्कूल में खाना खाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला।
मिड-डे-मील के राजमा में कीड़े मिलने की बात अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। लोगों के बीच अब बहस का मुद्दा भी बन गया है। एक शिक्षक नेता ने सवाल उठाया है कि सबने देखा की कीड़ा है पर प्रशासन को सबूत चाहिए। बड़हलगंज के एक शिक्षक ने लिखा है कि यदि स्कूल में भोजन पका होता तो अब तक कई अध्यापक नप गए होते।

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सोमवार को 58 बच्चे ही आए स्कूल
कंपोजिट विद्यालय में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद अभिभावक भी अब बच्चों को भेजने से डर रहे हैं। एक ही परिसर में कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक के दो स्कूल हैं। दोनों स्कूलों में कुल 600 बच्चे पंजीकृत हैं। सोमवार को कुल 58 बच्चे ही पढ़ने आए। स्कूल के एक कमरे में प्रधानाध्यापिका चंद्रमा गौतम कुछ सहायक अध्यापकों के साथ बैठी थीं। उनसे जब बच्चों के बीमार के पड़ने के बारे में पूछा गया तो कुछ भी कहने से मना कर दिया। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि अधिकारियों ने जांच की है। उनके सामने सारा पक्ष रख दिया गया है। परिसर में खेल रहे बच्चों ने बताया था कि खाने में कीड़ा था। जो खाए, वे लोग बीमार पड़ गए।

रोटी और सोयाबीन-चने की सब्जी मिली
सोमवार को विद्यालय के बच्चों को मिड डे मील में रोटी, सोयाबीन और चने की सब्जी दी गई। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल की सभी अध्यापिकाओं और शिक्षामित्रों ने भोजन किया है। इस दौरान पूरी देखभाल की गई है। बच्चों ने बताया कि उनको केला भी खाने को मिला है।

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गांव के लोग गुस्से में थे, हम लोग घंटों रहे कैद

स्कूल से निकलते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला।
प्रधानाध्यापक भले ही कुछ बताने से हिचक रही थीं, लेकिन एक अध्यापक ने बताया कि हम लोगों की कोई गलती नहीं थी। बच्चों की तबीयत खराब होने पर तीन महिला शिक्षक उन्हें दो एंबुलेंस और एक ऑटो से सीएचसी ले गईं। इसकी सूचना पाकर बड़ी संख्या में लोग आ गए। हम लोग डर गए। कमरे को अंदर से बंद कर लिया। कुछ लोगों ने चैनल गेट तोड़ने का प्रयास किया। 11 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक हंगामा चला। पुलिस के आने पर ही राहत मिल सकी। हालांकि वह कुछ और बतातीं, इसके पहले एक शिक्षक ने उनको इशारा करके चुप करा दिया।

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बोले बच्चे
हम लोगों ने खुद देखा था कि राजमा की सब्जी में कीड़ा था। तभी तो उल्टी होने लगी। अब सब ठीक हैं। मम्मी ने कहा है कि स्कूल जाना तो खाना मत खाना। मैं अब घर से ही टिफिन लेकर जाऊंगा। -राज, कक्षा सात

मैंने राजमा और चावल खाया। कुछ देर बाद पेट में दर्द हुआ था। डॉक्टर की दवा खाने के बाद दर्द खत्म हुआ है। आज ही अस्पताल से घर आई हूं। -राधिका, कक्षा तीन

कई बच्चे बीमार पड़े थे। हम लोगों को खूब उल्टी हुई है। घर के लोग भी डर गए थे। अब ठीक महसूस कर रहा हूं। आज तो घर का खाना खाए हैं। -अजीत, कक्षा चार

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बोले अभिभावक
जब बच्चे बीमार नहीं पड़े तो उनको अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया। मैं दो दिन से बच्चों के साथ मेडिकल काॅलेज में ही था। कोई अधिकारी हालचाल पूछने नहीं आया। गनीमत रही कि बच्चे सकुशल हैं।-कमलेश, अभिभावक

मेरे दो बच्चे बीमार पड़े गए थे। बच्चों को कुछ हो जाता तो हम लोग क्या करते। बच्चों की हालत देखकर हम लोग डर गए थे। वह लोग लगातार उल्टी कर रहे थे। अब सबकी तबीयत ठीक है। -लक्ष्मीना, अभिभावक

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