बड़हलगंज निवासी सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि बड़हलगंज पंचायत क्षेत्र में सुबह 12 बजे से ही बिजली गुल है। पहले लगा कि यह सामान्य बात है। शाम तक आपूर्ति नहीं हुई तो पता चला कि बिजली निगम का विरोध प्रदर्शन चल रहा। अब बिजली कब आएगी? यह बताने वाला कोई नहीं है।
केस 2
मुफ्तीपुर निवासी शिवांगी श्रीवास्तव ने कहा कि रात में पहले बिजली गुल हो गई थी। लगा आपूर्ति में कोई दिक्कत आ गई है, अभी आ जाएगी। लेकिन, सुबह बिजली आई। आई भी तो वोल्टेज लो था। घरों के पानी की टंकी खाली हो गई। दोपहर 12 बजे आपूर्ति बहाल होने पर टंकी भरी गई।
केस 3
चौरीचौरा निवासी करुणेश ने कहा कि चौरीचौरा के रामपुर में शाम चार बजे से बिजली गुल है। विभाग के किसी जिम्मेदार का नंबर नहीं लग रहा था। बिजली घर गए तो वहां ताला लटका था। आपूर्ति संबंधी दिक्कत के बारे में सूचना देने वाला तो कोई होना चाहिए था। उपभोक्ता परेशान हो रहे।
ऊर्जा प्रबंधन पर स्वेच्छाचारी, तानाशाहीपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को भी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहा। सुबह मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे अभियंताओं के बीच क्षेत्राधिकारी कोतवाली रत्नेश्वर सिंह पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार से कानून व्यवस्था प्रभावित न हो, इसका ख्याल रखा जाए।
इसके बाद, मुख्य अभियंता कार्यालय पर विरोध सभा का आयोजन हुआ। ऊर्जा प्रबंधन की हठधर्मिता पर सवाल उठाते हुए कर्मचारी नेता ऐश्वर्य सिंह ने कहा कि हमारा विरोध प्रबंधन के खिलाफ है। इसका असर उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसका ध्यान देना होगा। विरोध तभी तक सफल है जबतक सब एक हैं। बिखरे तो आंदोलन को तोड़ दिया जाएगा।
कर्मचारी नेता कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक उच्च प्रबंधन द्वारा संघर्ष समिति से वार्ता कर 15 सूत्री मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं ले लिया जाता तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। कर्मचारी नेता शिवम चौधरी ने बताया कि रात 10 बजे से 72 घंटे की हड़ताल शुरू हो गई। महाराजगंज में की गई गिरफ्तारी का विरोध सभी अभियंता करते हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी किया समर्थन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी बिजली निगम के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने समर्थन पत्र मुख्यमंत्री को ट्वीट कर उनसे मांगे स्वीकार किए जाने की अपील की। ट्वीट किया कि बिजली कर्मचारियों की जायज मांगों पर पूर्व में हुए समझौते को मानते हुए हड़ताल समाप्त कराई जाए।